तेईसवीं पहेली: कलियुग - ब्राह्मणों ने इसे अनंत क्यों बनाया? - Page 304

तेइसवीं पहेली

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किस स्थिति में नियोग कराया जा सकता है। नियोग किसी व्यक्ति के जीवन-काल में होता था और उन स्थितियों में भी जहां पति संतानोत्पत्ति की अक्षमता से नहीं उभर पाता हो। सम्भवतः पहल पत्नी की ओर से की जाती थी। हां, पुरुष का चुनाव भी उसी का होता था। उसे यह स्वतंत्रता थी कि यह निर्णय कर सके क उसे किस पुरुष से नियोग कराना है और कितने बार। नियोग अवैध संभोग का दूसरा नाम है, जो एक रात के लिए भी हो सकता था, बारह वर्ष तक भी या तब तक, जब तक कि इस व्यभिचार के प्रश्रयदाता पति की सहमति होती थी।

आर्यों के प्राचीन समाज में जन-सामान्य का यह आचरण और नैतिकता थी। ब्राह्मणों का चरित्र कैसा था? सच यह है कि वे जन-सामान्य से बेहतर नहीं थे। ब्राह्मणों की दुश्चरित्रता के अनेक उदाहरण हैं। परन्तु कुछ का उदाहरण पर्याप्त होगा। यह तो पहले ही बताया जा चुका था कि ब्राह्मण अपनी पत्नियां बेच दिया करते थे। हम उनकी दुश्चरित्रता की और मिसालें देंगे। उत्तंक वेद का शिष्य था जो जनमेजय तृतीय का पुरोहित था। वेद की पत्नी उत्तंक से अनुनय करती है कि वह उसे पत्नी के रूप में भोगे और संभोग-सुख के लिए उसके पास आए। दूसरा प्रसंग उद्दालक की पत्नी का है। वह स्वेच्छा से अथवा बुलाने पर किसी भी ब्राह्मण के पास जा सकती थी। श्वेतकेतु उसका पुत्र है, जो उसके पति के एक शिष्य से उत्पन्न हुआ था। व्यभिचार की यह मात्र मिसालें नहीं हैं। ये तो वे बातें हैं जिन्हें सब जानते हैं कि ब्राह्मण स्त्रियों को कितनी छूट थी। जटिल गौतमी एक ब्राह्मण स्त्री थी, जिसके सात पति थे, जो ऋषि थे। महाभारत में कहा गया है कि जब द्रौपदी को नगरवासियों ने अपने पांच पतियों के साथ देखा तो उसकी प्रशंसा की और उसकी उपमा जटिल गौतमी से दी जिसके सात पति थे। ममता उतथ्य की पत्नी है परन्तु उतथ्य के भाई बृहस्पति के उसके पास उतथ्य के जीवन-काल में ही खुला आना-जाना है। उसे केवल एक बार ममता की आपत्ति का सामना करना पड़ा, जब उसने कहा कि वह गर्भवती है, इसलिए अभी प्रतीक्षा करें परन्तु उसने यह नहीं कहा कि उनके ये संबंध अनुचित या अवैध हैं।

ब्राह्मणों के बीच ऐसी अनैतिकता व्याप्त थी कि जब बहुपतित्व के कारण दुर्योधन ने द्रौपदी पर कटाक्ष किया और उसकी गाय से उपमा दी तो उसने कहा कि तेरे पतियों को तो ब्राह्मण के घर पैदा होना चाहिए था।

अब जरा ऋषियों की नैतिकता का विवेचन करें। हम वहां क्या देखते हैं? पहली चीज जो हम ऋषियों में पाते हैं, वह भी पशुगमन। विभाण्डक ऋषि का उदाहरण लें। महाभारत के वन पर्व के 100वें अध्याय में कहा गया है कि वह एक हिरनी के साथ व्यभिचार करता था। उससे एक पुत्र भी उत्पन्न हुआ जिसे शृंग ऋषि कहा जाता है। महाभारत के आदि पर्व के अध्याय एक और 118 में एक कथानक है कि किस प्रकार पाण्डवों के पिता पाण्डु को दम (महाभारत में किंदम नाम है) ऋषि ने शाप दिया। व्यास कहते हैं कि किंदम ऋषि एक हिरणी के साथ जंगल में मैथुन में संलग्न था। जब वह इसमें लिप्त था तो पाण्डु ने उस पर एक तीर छोड़ा और