16 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
आर्द्र काठ से अग्नि उपजी, उससे भिन्न-भिन्न धुएँ उठे, इसकी श्वांस प्रक्रिया से महान ऋग्वेद बना, यजुर्वेद बना, सामवेद बना, अथर्ववेद, इतिहास, पुराण, विज्ञान, उपनिषद, श्लोक, सूत्र विभिन्न प्रकार के भाष्य बने। यह सब उसका श्वास है।’’
अन्य स्थान पर वह कहता है ख्1, ः
‘‘प्रजापति द्वारा वाच की रचना की गई, और उसके और आत्मा के माध्यम से वेदों सहित समस्त तत्वों का सृजन हुआ है।’’
‘‘उसी वाच और आत्मा के आध्यम से उसने सबका सृजन किया, चाहे वह ऋग्वेद हो, यजुस, साम, छंद, यज्ञ या विभिन्न जीव-जंतु हों।’’
तीन वेद, तीन तत्व हैं-वाच, मानस और श्वांस। वाच ऋग्वेद है। मानस यजुर्वेद है और श्वांस सामवेद।
IV
अब हम स्मृतियों पर आते हैं। मनुस्मृति में वेदों की उत्पत्ति के संबंध में दो सिद्धांत हैं। एक स्थान ख्2, पर वह कहती है कि वेदों की रचना ब्रह्मा ने की हैः
‘‘उसी ब्रह्म ने आरम्भ में वेद से शद्व सृजन कर पृथक-पृथक नाम, कर्म तथा व्यवस्था बनाईं। उसी भगवान ने इन्द्रादि देव कर्मस्वभाव, प्राणी, अप्राणी, साध्यगण और सनातन यज्ञ की सृष्टि की। इस ब्रह्मा ने यज्ञों की सिद्धी के लिए अग्नि, वायु और सूर्य से नित्य ऋग्वेद , यजुर्वेद और सामवेद को क्रमशः प्रकट किया।’’
एक अन्य स्थान ख्3, पर ऐसा आभास मिलता है कि प्रजापति वेदों का जनक है जैसा कि निम्नांकित से प्रकट हैः
‘‘ब्रह्मा ने ऋव्Q आदि तीनों वेदों से क्रमशः ‘‘अ, उ, म’’ इन तीन अक्षरों तथा
‘‘भू, भुवः, स्वः’’ इन तीनों व्याहृतियों को निकाला है। परम श्रेष्ठ ब्रह्मा ने ऋव्Q
आदि तीनों वेदों से ‘‘तत’’ शब्द से प्रारंभ होने वाला इस सावित्री (अथवा गायत्री)
का एक तिहाई पद निकाला है। ओमकार-पूर्विका ये तीनों भूः भुवः स्वः अनश्वर
तत्व नाशरहित है और त्रिपदा गायत्री वेदों का मुख है।’’
म्यूर, संस्कृत टैक्स्ट, खंड 1, पृ. 9
वही पृ. 6
वही पृ. 7