तेईसवीं पहेली: कलियुग - ब्राह्मणों ने इसे अनंत क्यों बनाया? - Page 310

तेइसवीं पहेली

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देवर, ज्येष्ठ ने भाभी के साथ बड़ों की अनुमति के बिना सहवास किया है या यदि अन्य परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं (यदि पति से पुत्र पहले ही हैं) और उसने बड़ों की सहमति से ही सहवास किया हो तो वह परिजन मैथुन का पापी होगा।य्

आर्यों के प्राचीन समाज में कुछ अन्य सुधार किये गये, जो नैतिक उत्थान के लिए था। विवाह के संबंध में कुछ निषेधात्मक नियम बनाए गए, जिससे पिता, पुत्री, भाई-बहन, मां-बेटे और दादा-पोती के बीच विवाह वर्जित कर दिए गए, गुरु की पत्नी के साथ संभोग को भी जघन्य पाप घोषित किया गया। जुए पर रोक लगाने के प्रयत्नों के भी प्रमाण हैं। धर्मसूत्रों के प्रत्येक लेख में ऐसे विधान के प्रसंग हैं जिनमें राजा से कहा गया कि राजा का कर्त्तव्य है कि राजदण्ड से कठोर दण्ड देकर जुए पर नियंत्रण करें।

कलियुग के आरंभ होने से काफी पहले ये प्रसंग मिलते हैं। यह स्वाभाविक है कि नैतिक दृष्टि से कलियुग बेहतर है। यह कहना कि कलियुग में नैतिकता का ”ास हो रहा है, न केवल निराधार है बल्कि स्पष्ट रूप से पथभ्रष्टता है।

V

कलियुग के संबंध में इस विवेचन से बहुत-सी पहेलियां उत्पन्न होती हैं। महायुगों का विचार कब जन्मा? यह सत्य है कि संसार भर में अतीत को स्वर्गीय समझा जाता है। महायुग की कल्पना यहां भी की जाए तो कोई अजीब बात नहीं। अन्यत्र यह मान्ता है कि स्वर्णयुग गया तो गया। परन्तु महायुग का मोह हमारे यहां जीवित है। वह एक चक्र पूरा होने पर फिर आएगा।

दूसरी पहेली है कि कलियुग 165 ई.पू. समाप्त क्यों नहीं हुआ जबकि

खगोलशास्त्रियों के अनुसार यह समाप्त हो जाना चाहिए था। तीसरी पहेली कलियुग की संध्या और संध्यांश का है। यह स्पष्ट है कि यह बाद की कल्पना है क्योंकि विष्णु पुराण में उनका उल्लेख अलग से किया गया है। यह जोड़ी क्यों गई? फिर काल-गणना के संबंध में भी झमेला है। पहले कलियुग का समय सामान्य वर्ष में गिना गया था किन्तु बाद में कहा गया ये दैवी वर्ष है। इसका अर्थ हुआ जो कलियुग 1200 वर्ष में बीत जाना था, उसकी अवधि का विस्तार 4,32,000 वर्ष तक होगा। यह नई खोज क्यों की गई? कलियुग का इतना लम्बा विस्तार वैदिक ब्राह्मणों ने क्यों किया? क्या यह कुछ शूद्र राजाओं पर अनुचित दबाव जमाने की चाल थी कि कलियुग की खोज कर ली गई और उसे अनंत बना दिया गया ताकि प्रजा को उनके राज पर विश्वास न रहे?