300 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के पुत्रों, देवताओं और ऋषियों के विषय में बताता हूं। इस काल (द्वितीय मन्वंतर) के देवता थे, पारावत और तुषित उनका इन्द्र था फ्विपश्चित। उनके सप्तर्षि थे ऊर्ज, स्तंभ, प्राण, दत्तोली ऋषभ, निश्चर और अर्वरीवट। मनु के पुत्र थे चैत्र और किंपुरूष।
तीसरे मन्वंतर के मनु थे औतमी उसके समय के इन्द्र थे, सुशांति, देवताओं के नाम है स्वधामा, सत्य, शिव प्रतर्दन और वसुवृति। प्रत्येक पांच वर्ग के बारह देवता थे। उस समय सप्तर्षि वशिष्ठ के सात पुत्र थे और अज, परसु, दिव्य तथा अन्य मनु के पुत्र थे।
चौथे मनु तामस के काल में पूजनीय देवता थे, सुरूप, हरि, सत्य और सुधि। प्रत्येक के सत्ताईस देवता थे। शिवी उस काल का इन्द्र था जिसे शत क्रतु भी कहा जाता है। इसने सौ यज्ञ किए थे। सप्तऋषि थे ज्योतिधाम, पृथु, काव्य, चैत्र, अग्नि, वानक, पिवर तामस मनु के पुत्र थे, नर, ख्याति, सांतहय, जनुजंघा आदि।
पांचवें मन्वंतर के मनु रैवत थे। उनका इन्द्र विभु था। देवता इस प्रकार थे अमिताभ, अभूतराजास, वैकुंठगण, सुमेधा। सप्तऋषि थेः हिरण्यरोम, वेदशिरा, ऊर्ध्वबाहु, वेदबाहु, सुधमन, पर्जन्य और महामुनि। रैवत के पुत्र इस प्रकार थेः बालबंधु सुसम्भाव्य, सत्यक तथा अन्य साहसी राजा।
स्वारोचिष, औतमी, तामस और रैवत प्रियव्रत की संतान थे जिसने अपनी उपासना से विष्णु को प्रसन्न करके अपनी संतति के लिए मन्वंतरों का मनु बनाए जाने का वर प्राप्त कर लिया था।
फ्छठे मन्वंतर का मनु चाक्षुष था, उसका इन्द्र मनोज्व था उस काल के देवता थे आदय, प्रस्तुत, भव्य, पृथुग और लेखगण जिनके आठ और देव थे_ उस काल के सप्तर्षि थे सुधामा, विरजा हविष्मान, उत्तम, मधुर, अतिमान, सहिष्णु। चाक्षुष के पुत्र थे उरु, पुरु, शतद्युम्न आदि।य्
वर्तमान सातवें मन्वंतर के मनु अन्त्येष्टि देव सूर्य की अनुपम संतान वैवस्वत हैं_ उनके देवता हैं, आदित्य, वसु और रुद्र_ उनका इन्द्र है पुरन्दर_ सप्तर्षि हैं-वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज। वैवस्त मनु के नौ पुत्र ओजस्वी हैं। इक्ष्वाकु नाभाग, ध्रष्ट, सन्मति, नरिश्यंत, नाभानिदिष्ट, करुष, प्रिषध्र और यशस्वी वसुमत।
अभी सात मन्वंतरों का विवरण दिया गया है जो विष्णु पुराण में उल्लिखित हैं। ये विष्णु पुराण लिखे जाने तक की स्थिति थी। क्या मन्वंतर शासन बाह्म था? इस विषय में ब्राह्मण मौन हैं। परन्तु विष्णु पुराण के लेखक को पता है कि सात मन्वंतर अभी और आने हैं। इनका विवरण इस प्रकार हैः ख्1,
- विल्सन, विष्णु पुराण, पृ. 266-69.