चौबीसवीं पहेली
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विश्वकर्मा की पुत्री संजना सूर्य की पत्नी थी। उसकी तीन संतानें मनु (वैवस्वत) यम और यमी (अथवा यमुना नदी) थीं। अपने पति का तेज झेलने में असमर्थ संजना ने उसे सेविका के रूप में छाया दे दी और स्वयं उपासना के लिए वनों में चली गई। सूर्य ने छाया को अपनी पत्नी संजना जानकर उससे तीन संतान और उत्पन्न कीं, शनिश्चर, द्वितीय मनु (सावर्णी) और पुत्री ताप्ती। छाया को एक बार यम पर क्रोध आ गया, उसने उसे शाप दे दिया। साथ ही यम को और सूर्य को यह भी बता दिया कि वह वास्तविक संजना नहीं हैं। छाया के बताने पर कि उसकी पत्नी जंगलों में चली गई है, सूर्य ने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा कि वह घोड़ी-रूप में तपस्या रत है (उत्तर कुरु प्रदेश में) सूर्य ने घोड़े के रूप में पुनर्जन्म लिया और अपनी पत्नी के पास पहुंच गया और उससे तीन अन्य संताने उत्पन्न कीं, दो अश्विन और रेवंत और फिर संजना को घर ले आया। विश्वकर्मा ने नक्षत्र की गहनता कम करने के लिए उसकी दीप्ति घटाने के उद्देश्य से अपनी चक्री पर चढ़ाया और उसे घिसकर आठवां भाग कर दिया क्योंकि इससे अधिक अविभाज्य था। जो दैवी वैष्णव भव्यता सूर्य में थी, वह विश्वकर्मा के घिसने से धरती पर गिरी, शिल्पीश्रेष्ठ ने उससे विष्णु का चक्र, शिव का त्रिशूल, कुबेर का शस्त्र और कार्तिकेय का वेलु बनाया और अन्य देवों के शास्त्र भी बनाए। विश्वकर्मा ने इन सबका निर्माण सूर्य की फालतू किरणों से किया।
छाया का पुत्र भी मनु कहलाया उसी वर्ण का होने के कारण उसका दूसरा नाम सावर्णी पड़ा जैसा कि उसके बड़े भाई मनु वैवस्वत का था। वह आठवें मन्वंतर का मनु है। अब मैं उसका विवरण निम्न बातों के साथ देता हूं। जिस काल में सावण् ार् मनु बनेंगे, उनके देववर्ग इस प्रकार होंगे सुतप, अग्निताभ और मुख्य प्रत्येक के इक्कीस सप्तर्षि इस प्रकार होंगे दीप्तिमान, गालव, राम_ कृप, द्रोणि मेरा पुत्र व्यास छठा और ऋष्यऋंग सातवां ऋषि होगा। इस युग का इन्द्र बलि होगा। विरोचन का निष्पाप पुत्र विष्णु की कृपा से पाताल राज बनेगा। सावर्णी की संतानें होंगी। विराज, अर्वरीव, निर्मोह आदि।
नौवें मनु दक्ष सावर्णी होंगे। इस समय के देव होंगे पारस, मारीचि गर्भ और सुधर्मी। प्रत्येक वर्ग में बारह देव होंगे उनका मुख्य इन्द्र होगा अभूत। सवन, द्युतिमान, भव्य, वसु, मेधातिथि ज्योतिषमान और सत्य ये सप्तर्षि होंगे। धृतकेतु, द्रप्तिकेतु, पंचहस्त, निर्भय, पृथुसर्व आदि मनु के पुत्र होंगे।
दसवें मन्वंतर में मनु ब्रह्मा सावर्णी होंगे_ उनके देवगण होंगे सुधामा, विरूद्ध शतसांख्य, उनका इन्द्र महातेजस्वी शांति होगा। सप्तऋषि होंगे हविष्मान, सुकृति, सत्य, अप्पममूर्ति, नाभाग, अप्रतिमजा और सत्यकेत। मनु के दस पुत्र होंगे। सुक्षेत्र, उत्तमजा, हरिषेण आदि।