चौबीसवीं पहेली
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फ्कृत, त्रेता, द्वापर और कलियुग वे राजा के कार्यों के रूप हैं क्योंकि राजा युग कहलाता है। जब वह सोता है तो कलि है, गतिमान है तो द्वापर है, कार्योद्यत है तो त्रेता है, बढ़ता हुआ है तो कृत है।य्
जब मनु की हम उनके पूर्ववर्तियों से तुलना करते हैं तो हमें स्वीकार करना पड़ता है कि इन शब्दों के भावार्थ में स्पष्ट अंतर आ गया। जो शब्द जुए की शब्दावली थी वह राजनीतिक बन गई, जिसमें राजा की कर्त्तव्य परायणता और ऐसे राजाओं की तुलना की गई, जो क्रियाशील हैं, जो कार्योच्छुक हैं, जो सचेत हैं और जो सोते रहते हैं। उनके लिए राज्य जाए भाड़ में।
प्रश्न यह है कि किन परिस्थितियों में ब्राह्मण कलियुग का सिद्धांत प्रतिपादित करने को विवश हुए? ब्राह्मणों ने कलियुग को पतित समाज का पर्याय क्यों बना डाला? मनु ने एक सोते हुए राजा को कलिराज क्यों कहा? मनु के समय कौन राजा था? उसे सोता हुआ राजा क्यों कहा गया? ऐसी कुछ पहेलियां हैं जो कलियुग सिद्धांत से उत्पन्न होती हैं।
कलियुग संबंधी अन्य पहेली भी है। एक है कलियुग वास्तव में कब आरंभ हुआ?
कलियुग कब आरंभ हुआ, उसके समय के संबंध में कई सिद्धांत हैं? पुराणों ने दो तिथियां दी हैं। कुछ के अनुसार यह ईसा पूर्व चौदहवीं शताब्दी में आरम्भ हुआ। कुछ का कथन है कि यह ई.पू. 18 फरवरी, 3102 से आरम्भ होता है, जब कौरव-पाण्डवों के बीच युद्ध की शुरुआत बताई जाती है। प्रो. अयंगर ने कहा है कि ऐसे कोई प्रमाण नहीं है कि जिनसे यह प्रकट होता हो कि ईसवी की सातवीं शताब्दी के पूर्व कलियुग का कोई उल्लेख हुआ हो। सर्वप्रथम इसका प्रयोग पुलकेशिन द्वितीय के काल के एक लेख में हुआ है, जिसमें 610 से 642 ईसवी तक बादामी पर शासन किया। इसमें दो तिथियां हैं, शक संवत् 556 और कलि संवत् 3735। इन तिथियों से कलियुग का आरम्भ 3102 ईसवी पूर्व बैठता है। यह गलत है कि ई.पू. 3102 न तो महाभारत-युद्ध की तिथि है और ना ही कलि के आरम्भ की। श्री काणे ने यह अंतिम रूप से प्रमाणित कर दिया है। विभिन्न वंशों के उन राजाओं के विषय में, जिन्होंने पाण्डव-पुत्र परीक्षित के काल में शासन किया, सबसे पक्का कथन यह है कि महाभारत की तिथि ई.पू. 1263 थी। यह ई.पू. 3102 नहीं हो सकती। श्री काणे ने यह भी कहा है कि ई.पू. 3102 कल्प के आरम्भ की तिथि है, कलि आरम्भ की नहीं। इस आलेख में कालपदि को कल्यादि पढ़ लिया गया। इस प्रकार कोई निश्चत तिथि नहीं है, जिसे ब्राह्मण कलि का आरम्भ कह सकें। एक निश्चित तिथि होनी चाहिए थी जिससे इतनी बड़ी घटना की शुरूआत बताई जाती। यह पहेली है।
परन्तु और भी पहेलियां हैं, जो इस प्रकार हैंः