320 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
वाल्मीकि ने बहुत बारीकी से वर्णन किया है। ख्1, उसके अनुसार पूरा दिन पूर्वाह्न और अपराह्न में विभाजित रहता था। सवेरे से मध्याह्न तक वह पूजा पाठ में व्यस्त रहते थे। अपराह्न वे क्रमशः दरबारी विदूषकों और अंतःपुर में व्यतीत करते थे ख्2, । जब वे रंग महल से ऊब जाते थे तो विदूषकों की संगति करते थे और जब विदूषकों से ऊब जाते थे, रंगमहल में चले जाते थे। वाल्मीकि विस्तार से बताते हैं कि राम रनिवास में कैसे समय बिताते थे? यह रंग महल अशोक वन नामक उपवन में था। वहीं राम भोजन करते थे। वाल्मीकि के अनुसार उनके भोजन में अनेक स्वादिष्ट व्यंजन होते थे। उसमें मांस, फल और मदिरा सम्मिलित थी। राम मद्य त्यागी नहीं थे। वे प्रचुर मात्रा में मदिरापान करते थे और सीता को भी मदिरापान में सहभागिनी बनाते थे। ख्3, राम के अंतःपुर का जैसा वर्णन वाल्मीकि ने किया है, वह कोई मामूली बात नहीं है। नाच-गाने में अप्सराएं, उरग और किन्नर बालाएं सम्मिलित होती थीं। अन्य क्षेत्रों से भी सुन्दर नारियां लाई जाती थीं। राम सुरा और सुंदरियों के मध्य विराजते थे। वे राम को आनन्दित करतीं और राम उन्हें माला पहनाते। वाल्मीकि ने राम को स्त्रियों के प्रिय पुरुषों का राजकुमार कहा है। यह उनकी एक दिन की जीवनचर्या नहीं थी। यह उनके जीवन की नियमित गति थी।
जैसा कि पहले कहा जा चुका है, राम ने प्रजा-कार्यों से हाथ खींच रखा था। वह अन्य भारतीय राजाओं की तरह प्रजा का दुख-दर्द सुनकर निवारण का कोई प्रयास नहीं करते थे। वाल्मीकि के अनुसार मात्र एक अवसर पर उन्होंने व्यक्तिगत रूप से किसी की शिकायत सुनी। किन्तु दुर्भाग्य से यह घटना बहुत दुखांत है। उन्होंने किसी की एक गलती के लिए स्वयं इतना बड़ा अपराध किया, जिसकी इतिहास में मिसाल नहीं है। यह घटना थी-एक शुद्र शम्बूक की हत्या। वाल्मीकि ने लिखा है- फ्राम-राज्य में किसी की अकाल मृत्यु नहीं होती थी। परन्तु किसी ब्राह्मण के पुत्र की अकाल मृत्यु हो गई। दुःखी पिता मृत पुत्र के शव को राजा के महल पर ले आया और वहीं रख दिया और जोर-जोर से विलाप करने लगा और अपने पुत्र की मृत्यु पर राम को भांति-भांति से कोसने लगा। वह कह रहा था कि इसके राज्य में यह पापाचार का परिणाम है और यदि राजा अपराधी को दण्ड नहीं देगा तो वह पुत्र उसे नहीं मिलेगा। वह राम के द्वार पर अनशन करेगा और अन्न-जल लिए बिना अपने प्राण त्याग देगा। राम ने नारद और आठ विद्वान ऋषियों की सभा बुलाईं। उन्होंने कहा कि उनकी प्रजा में से सम्भवतः कोई शूद्र तपस्या कर रहा है। यह धर्म विरुद्ध है क्योंकि तपस्या करने का अधिकार मात्र द्वि जों को है। राम समझ गए कि धर्म का उल्लंघन करके वह पाप कर रहा है। उसी के कारण ब्राह्मण का पुत्र मर गया। इसलिए राम ने अपना पुष्पक विमान मंगाया और राज्य
उत्तरकाण्ड सर्ग 42, श्लोक 27
उत्तरकाण्ड सर्ग 43, श्लोक
उत्तरकाण्ड सर्ग 42, श्लोक 8