परिशिष्ट-1
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के आंतरिक भागों में अपराधी को खोजा। अंत में घने जंगलों में सुदूर दक्षिण में उन्होंने एक व्यक्ति को कठोर तपस्यारत देखा। वे उसके पास गए और उसके यह बताने के बाद कि वह शम्बूक नाम का शूद्र है और वह सशरीर स्वर्ग जाने के लिए तपस्या कर रहा है, उन्होंने उसे चेताया तक नहीं, अनधिकृत कार्य न करने के लिए समझाया भी नहीं। बस! बेझिझक उसका सिर काट दिया। देखा! उसी समय दूर अयोध्या में बाह्मण पुत्र की सांस चलने लगी। जंगल में देवताओं ने पुष्प वर्षा की कि राजा ने एक शूद्र को आकाश में उनकी नगरी में आने से रोक दिया, जो तपस्या के बल पर वहीं पहुंच जाता जिसे तपस्या का अधिकार नहीं है। वे राम के सम्मुख प्रकट हुए और उन्हें बधाई दी। जब राम ने ब्राह्मण के पुत्र को जीवित करने का अनुरोध किया तो उन्होंने बताया कि वह जीवित हो चुका है। फिर वे चले गऐ। राम तब पास ही अगस्त्य ऋषि के आश्रम में पहुंचे। उन्होंने शम्बूक को दी गई सजा पर उनकी प्रशंसा की और उन्हें एक ताबीज भेंट किया। राम राजधानी लौट आए।य् ऐसे थे राम!
II
अब कृष्ण के संबंध में।
वह महाभारत के नायक हैं। वास्तव में तो महाभारत का मुख्यतः संबंध कौरव ओर पाण्डवों से है। यह उस युद्ध की कहानी है, जो दोनों पक्षों ने अपने पूर्वजों के राज्य पर अधिकार प्राप्त करने के लिए किया। वही मुख्य चरित्र होने चाहिए। परन्तु वे नहीं हैं। इस महाकाव्य के नायक कृष्ण हैं। यह थोड़े आश्चर्य की बात है। परन्तु इससे भी आश्चर्यजनक यह हो सकता है कि वे कौरव-पाण्डवों के समकालीन ही न हों। कृष्ण पाण्डवों के मित्र थे और उनका अपना साम्राज्य था। कृष्ण कंस के शत्रु थे। उसका भी साम्राज्य था। यह सम्भव नहीं लगता कि दोनों राज्य साथ-साथ विद्यमान थे। महाभारत में ऐसा कहीं प्रतीत नहीं होता कि दोनों राज्यों के बीच कोई सम्पर्क थे। बाद में कृष्ण को इस नाटक में और बड़ी भूमिका देने के लिए कृष्ण और पाण्डवों की कहानियों को मिश्रित कर दिया गया। इन दोनों कहानियों को जोड़ने का करिश्मा व्यास का था, जिसमें कृष्ण को गौरवान्वित करने के लिए उन्हें सबके ऊपर बैठा दिया।
व्यास ने कृष्ण को मानवों में देवता बना दिया। इसी कारण उन्हें महाभारत का नायक बना दिया गया। क्या कृष्ण सचमुच भगवान कहलाने योग्य हैं? उनकी सक्षिप्त जीवनी से इस प्रश्न का उत्तर मिल जाएगा। कृष्ण भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि में मथुरा में पैदा हुए थे। उनके पिता यदुवंश के वसुदेव थे। उनकी माता देवक की पुत्री देवकी थीं जो मथुरा के राजा उग्रसेन का भाई था। उग्रसेन की पत्नी के सौभराज द्रुमिल दानव के साथ अवैध संबंध थे। उसी का जारज पुत्र कंस था। एक प्रकार से वह देवकी का भाई था। कंस ने उग्रसेन की बंदी बनाकर राज्य पर