322 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अधिकार कर लिया। नारद अथवा देववानी से यह आकाशवाणी सुनकर कि देवकी की आठवीं संतान वध करेगी कंस ने देवकी और उसके पति को बंदी बना लिया और उनकी छह संतानों को जन्म लेते ही मार डाला। सातवीं संतान को देवकी के गर्भ से वसुदेव की दूसरी रानी रोहिणी के गर्भ में चमत्कारी ढंग से छोड़ दिया। जब आठवीं संतान कृष्ण ने जन्म लिया तो उनके पिता उन्हें चुपके से ले गए जहाँ ब्रज में नंद और यशोदा रहते थे। दैवी बालक को पार पहुँचाने के लिए यमुना का पानी उतर गया। नागराज अनन्त ने अपना फन फैलाकर वर्षा से उनकी रक्षा की। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वसुदेव ने नंद की नवजात कन्या योगेन्द्र अथवा योगमाया से उन्हें बदल लिया और अपना आठवां शिशु बताकर कंस को सौंप दिया परन्तु वह बालिका आकाश में उड़ गई और कहा कि नंद और यशोदा के यहां पल रहा बालक कृष्ण उसका संहार करेगा। इसके बाद कंस ने बालक कृष्ण की हत्या के लगातार असफल प्रयत्न किए। इस उद्देश्य से उसने विभिन्न रूपों में कई असुर ब्रज में भेजे। कृष्ण की बाल-लीलाओं के संबंध में पुराणों में इन असुरों का संहार और सामान्य बालक के लिए असंभव वीरता-प्रदर्शन कृष्ण की महिमा बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। इनमें कुछ का महाभारत में भी उल्लेख है। जैसी कि आशा की जा सकती है, विद्वान इन वर्णनों से असहमत हैं। हम उनमें से कुछ का ही उल्लेख करते हैं जिन्हें पारवर्ती विद्वानों ने माना है।
इनमें से प्रथम है पूतना वध। वह कंस के यहां धाय थी और कंस ने उसे हरिवंश (पुराण) के अनुसार एक गिद्धनी के रूप में भेजा था। भागवत के अनुसार वह एक सुंदरी के भेष में गई थी। उसने कृष्ण को दूध पिलाने के बहाने अपने विषयुक्त स्तन उनके मुंँह में डाल दिए। उन्होंने उसके स्तनों को इतने जोर से चूसा कि उसके प्राण ही खींच लिए और वह धराशायी हो गई।
केवल तीन मास होने पर ही एक अन्य आश्चर्य कर दिखाया। यह एक शकट अथवा गाड़ी को तोड़ना था, जिसमें अनेक बर्तन लदे हुए थे। उनमें दूध-दही भरा था और लदी हुई गाड़ी उन पर चढ़ गई। ‘हरिवंश’ के अनुसार शकट कंस द्वारा भेजा गया असुर था, जिसे उन्हें कुचलने के लिए भेजा गया था। बहरहाल, यशोदा ने कृष्ण को गाड़ी के नीचे लिटा दिया और यमुना में स्नान करने चली गई। जब वह लौटकर आई तो बताया गया कि कृष्ण ने ठोकर मारकर उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए जो भूमि पर बिखरे पड़े थे। भयभीत यशोदा इससे आश्चर्यचकित रह गई। उसने अनहोनी टालने के लिए पूजा कराई।
जब कृष्ण की हत्या के लिए पूतना और शकट के प्रयत्न विफल हो गए तो कंस ने अपना एक और दूत तृणव्रत भेजा। वह एक पक्षी के रूप में आया और उन्हें उड़ाकर आकाश में ले गया। कृष्ण तब मात्र एक वर्ष के थे परन्तु तृणव्रत निष्प्राण