326 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अब कृष्ण का प्रथम विवाह हुआ। उनहोंने विदर्भराज, भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी से विवाह किया। रुक्मिणी का पिता जरासंध के कहने पर कृष्ण के फुफेरे भाई चेदि राज, शिशुपाल से उसका विवाह रचा रहा था। परन्तु भावरों के एक दिन पूर्व ही रुक्मिणी का हरण कर लिया गया। भागवत का कथन है कि रुक्मिणी को कृष्ण से प्रेम हो गया था और उन्होंने कृष्ण को एक प्रेमपत्र लिखा था। यह सत्य नहीं लगता क्योंकि कृष्ण रुक्मिणी के सच्चे और आस्थावान पति नहीं थे। धीरे-धीरे रुक्मिणी की सौतों की कतार बढ़ती गई और वह संख्या सोलह हजार एक सौ साठ हो गईं। उनकी संतान की संख्या एक लाख अस्सी हजार थी। उनकी पटरानियां भी आठ थीं, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिन्दी, मित्रबिंदा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा। शेष सोलह हजार एक सौ के साथ एक ही दिन विवाह किया था। वे प्रागज्योतिष के राजा नरक की पत्नियां थीं, जिसका कृष्ण ने इन्द्र के आह्वान पर वध कर दिया था, नरक उनकी मां के कुण्डल ले आया था। युद्ध के पश्चात् जब कृष्ण सत्यभामा के साथ स्वर्ग में इन्द्र के पास गए तो उनकी पत्नी को पारिजात वृक्ष भा गया। अपनी पत्नी का मन रखने के लिए कृष्ण को उसी वैदिक देवता से युद्ध करना पड़ा, जिसकी उन्होंने सहायता की थी परन्तु भगवान के अवतार से लोहा लेना बहुत कठिन था। इसलिए इन्द्र को पारिजात वृक्ष देना पड़ा जो द्वारिका में लगा दिया गया। उन्होंने आठ पटरानियों से किस प्रकार विवाह किया, यह भी बड़ी रोचक कथा है। रुक्मिणी से उन्होंने कैसे विवाह किया, यह तो बताया जा चुका है। सत्यभामा सत्राजित की पुत्री थी, जो एक यादव राजा था और जिसने डरकर अपनी कन्या का विवाह कृष्ण से कर दिया था। जाम्बवती एक ऋक्ष प्रधान जाम्बवान की कन्या थी, जो यादवों से एक बहुमूल्य मणि लेकर भाग गया था और लम्बी लड़ाई के बाद उसने पराजित होकर अपनी कन्या उन्हें दे दी थी। कालिन्दी ने कृष्ण से विवाह करने के लिए अनेक तपस्याएं कीं और अंत में सफल रही। मित्रबिंदा कृष्ण की फुफेरी बहन थी और उसे स्वयंवर में जीतकर उन्होंने विवाह किया। सत्या अयोध्या के राजा नग्नजित की पुत्री थी। उन्होंने वीरता दिखाकर और कई बिगड़ैल बैलों को एक साथ मार कर नग्नजित की कन्या से विवाह हुआ। भद्रा उनकी फुफेरी बहन थी और उससे उनका विवाह सामान्य परिस्थितियों में हुआ। लक्ष्मणा मद्र देश के राजा बृहतसेन की पुत्री थी, जिसे उन्होंने स्वयंवर में प्राप्त किया था।
सुभद्रा के साथ अर्जुन के विवाह में कृष्ण की भूमिका पढ़ने योग्य है, जो बलराम की सहोदर और कृष्ण की सौतेली बहन थी। अर्जुन अपनी यात्रा के समय तीर्थस्थान प्रभास पहुंचे। कृष्ण ने रैवतक पर्वत पर उनकी अगवानी की। वहां वह सुभद्रा पर अनुरक्त हो गया और कृष्ण से पूछा। यह उसे कैसे मिले? कृष्ण ने उसे परामर्श किया