परिशिष्ट-I: राम और कृष्ण की पहेली - Page 343

328 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

एक-एक बात का खण्डन करते हुए कृष्ण को भरपूर गालियां दीं। कृष्ण की हाल ही की जीवनियों में कृष्ण और ब्रज बालिकाओं के संबंधों का कोई प्रसंग नहीं है जिनको शिशुपाल ने उछाला। नए जीवनीकारों का स्पष्ट संकेत है कि विभिन्न पुराणों की कथाओं को वे स्वीकार नहीं करते। बहरहाल, शिशुपाल के वक्तव्य के अंत में भीष्म फिर उठे और उन्होंने देखा कि युधिष्ठिर शिशुपाल और उनके सहयोगियों से आशंकित हैं कि कहीं वे उत्सव में बाधा न डाले। इसलिए उन्होंने चेताया कि यदि वे अपना वध चाहते हैं तो कृष्ण को चुनौती दें और उस दैवी पुरुष से युद्ध कर ले। इस पर शिशुपाल ने कृष्ण को चुनौती दी और कृष्ण के अनेक कुकर्मों का बखान किया। तब कृष्ण ने कहा फ्अपनी बुआ को दिए गए वचनानुसार मैंने शिशुपाल की एक सौ गालियों के लिए उसे क्षमा कर दिया है परन्तु अब जो अपशब्द उसने भरी सभा में मेरे विरुद्ध बोले हैं, उनके लिए मैं उसे क्षमा नहीं करूंगा। मैं आप सबके सामने इसका वध करता हूं।य् उन्होंने अपना सुदर्शन चक्र चलाया और शिशुपाल का सिर काट दिया।

अब महाभारत युद्ध में कृष्ण के कारनामे देखें। उनमें से कुछ इस प्रकार हैंः

  1. जब कृष्ण के मित्र सात्यिकी पर सोमदत्त पुत्र भूरिश्रवा भारी पड़ रहा था तो कृष्ण ने अर्जुन को उकसाया कि उसकी भुजा काट दे। इस प्रकार भूरिश्रवा का वध करने के लिए सात्यिकी का रास्ता साफ कर दिया।

  2. जब सात कौरव महारथियों ने अभिमन्यु को घेर कर मार डाला और अर्जुन ने प्रण किया कि यदि वह सूर्यास्त से पूर्व उन सातों के सरगना जयद्रथ का वध नहीं कर देंगे तो अग्नि में कूदकर प्राण दे देंगे। जब सूर्यास्त का समय था और जयद्रथ जीवित बच गया तो कृष्ण ने माया से सूर्य को छिपा दिया। इस पर जयद्रथ बाहर आ गया तो कृष्ण ने माया हटा ली और सूर्य निकल आया और अर्जुन ने जयद्रथ का वध कर दिया।

  3. जब द्रोण धर्मयुद्ध में पराजित नहीं हो रहे थे तो कृष्ण ने उन्हें अधर्म युद्ध में पराजित कराया। यदि उनके शस्त्र रखवा दिए जाएं तो उन्हें सरलता से समाप्त किया जा सकता है। यह तभी सम्भव है जब उनसे कहा जाए कि उनका पुत्र अश्वत्थामा मारा गया। भीम ने बताए तरीके के अनुसार अश्वत्थामा नामक हाथी को मार डाला। द्रोण यह सुनकर निराश तो हुए किन्तु उन्हें विश्वास नहीं आया। इस अवसर पर अनेक ऋषियों ने उन पर दबाव डाला कि वे शस्त्र डाल दें और ब्रह्म में ध्यान लगाकर स्वर्गगमन करें। इस पर उन्होंने धर्मराज युधिष्ठिर से अपने पुत्र के विषय में सही सूचना लेनी चाही। जब कृष्ण ने देखा कि युधिष्ठिर झूठ बोलने को तैयार नहीं हैं तो