24 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
‘‘पूर्ववर्ती ऋषि ने संकटमोचन हेतु तेरा आह्नान किया।’’
‘‘मुझ वर्तमान ऋषि की ऋचाएं सुनो, इस वर्तमान (ऋषि) की।’’
‘‘इन्द्र, तू पूर्ववर्ती ऋषियों के लिए एक आह्नान था, जिन्होंने अर्चना की - जैसे पिपासु के लिए जल। इस मंत्र द्वारा मैं तेंरा आह्नान करता हूँ।’’
‘‘पूर्ववर्ती ऋषियों, देदीप्यमान ऋषियों ने बृहस्पति के सम्मुख आह्लादपूर्व स्वर में प्रस्तुति की।’’
‘‘हे माधवन, किसी परवर्ती या पूर्ववर्ती पुरुष अथवा वर्तमान पुरुष में इतना पराक्रम नहीं।’’
‘‘क्योंकि (इन्द्र के) पूर्ववर्ती आराधक हम हो सकते हैं। ये निष्कलंक, अप्राप्य और अनाहूत थे।’’
‘‘हे शक्तिमान देव! इस हेतु लोग तेरे आराधक हैं, जैसे कि पूर्ववर्ती मध्य-युगीन और परवर्ती तेरे मित्र थे और हे परम आहूत, सभी वर्तमान वय वालों की सोच।’’
‘‘हमारे पूर्व पिता इन्द्र के लिए सात नवगव ऋषि अपने मंत्रों में भोजन की याचना करते हैं।’’
‘‘हमारे नवीनतम मंत्र से गौरवान्वित हो क्या आप हमें सम्पदा और संतति सहित भोजन देंगे?’’
ऋग्वेद के गहन अध्ययन से पता चलेगा कि उसके पुराने और नए मंत्रों के बीच अंतर है। उनमें से कुछ निम्नलिखित हैंः
‘‘हमारे नवीनतम मंत्र से गौरवान्वित हो तुम हमें सम्पदा और संतत सहित भोजन दो।’’
‘‘हे अग्नि तूने देवताओं के मध्य हमारे नवीनतम आह्नान की घोषणा की थी।’’
‘‘हमारे नवीन मंत्र से तेरा वेग बढ़ेगा पुरंदर हमें प्राणवान आशीर्वाद दे।’’
‘‘शक्ति पुत्र अग्नि को मैं एक नवीन ऊर्जावान मंत्र अर्पित करता हूं जो भाववाणी के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है।’’
‘‘जो नवीन अभिव्यक्ति अभी प्रस्फुटित हुई है, उसके द्वारा मैं शक्तिमान संरक्षक को मानस रचना प्रदान करता हूं।’’
‘‘हमारी सहायता हेतु गर्जन करने वाले पुंगव नया मंत्र तुझे उद्बोधित करे।’’
‘‘मैं पूर्वजों की भांति नवीन मंत्र द्वारा तुझे उत्प्रेरित करना चाहता हूं।’’
‘‘तेरी स्तुति में जो नए मंत्र रचे हैं, उनसे तू संतुष्ट हो’’।