छठी पहेली: वेदों की विषय-सामग्री : क्या वे कोई नैतिक अथवा आध्यात्मिक मूल्य रखते हैं? - Page 65

50 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

और क्या चाहिए जिससे स्पष्ट होता है कि वेदों में ऐसा कुछ नहीं है जिससे आध्यात्मिक अथवा नैतिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त होता हो। न तो उसकी विषय-वस्तु और न ही उसका स्वरूप, वेदों में संशयहीनता का औचित्य ठहराता है, जिसके ढोल पीटे गए हैं। तब ब्राह्मणों ने इतनी दृढ़ता से उन पर पवित्रता का मुलम्मा चढ़ाकर संशय रहित क्यों घोषित किया?