सातवीं पहेली: समय परिवर्तन या ब्राह्मण यह कैसे घोषित करते हैं कि वेद उनवेफ सभी शास्त्रों से तुच्छ हैं? - Page 66

सातवीं पहेली

समय परिवर्तन या ब्राह्मण यह कैसे घोषित करते

हैं कि वेद उनके सभी शास्त्रों से तुच्छ हैं?

I

हिंदुओं के धार्मिक साहित्य में, 1. वेद, 2. ब्राह्मण, 3. आरण्यक, 4. उपनिषद्, 5. सूत्र, 6. इतिहास, 7. स्मृत और 8. पुराण शामिल हैं।

जैसा कि कहा गया है, एक समय उनका महत्व एक समान था। उनके बीच श्रेष्ठता अथवा हीनता, पवित्रता अथवा लौकिकता, संशय अथवा संशय हीनता का कोई भेद नहीं था।

बाद में, जैसा कि हमने कहा है, वैदिक ब्राह्मणों ने सोचा कि वेदों और दूसरे धार्मिक साहित्य में अंतर होना चाहिए। उन्होंने वेदों को न केवल अन्य साहित्य से श्रेष्ठ घोषित कर दिया, अपितु उन्हें पावन और अमोघ भी बना दिया। वेदों को संशय रहित स्थापित करने के सिद्धांत को प्रतिपादित करते हुए उन्होंने पवित्र ग्रंथों को दो वर्गों में विभाजित कर दिया। 1. श्रुति और 2. अश्रुति। प्रथम विभाजन में उन्होंने आठ अंगों में से केवल दो को श्रेष्ठ रखा। 1. संहिता और 2. ब्राह्मण। शेष को उन्होंने अश्रुति घोषित कर दिया।

II

यह बताना संभव नहीं कि यह अंतर सर्वप्रथम कब उत्पन्न हुआ। परन्तु यह प्रश्न अधिक महत्वपूर्ण है कि किस आधार पर यह भेद किया गया। इतिहास और पुराणों को क्यों छोड़ दिया गया? आरण्यक और उपनिषद् क्यों छांट दिए गए? सूत्रों को क्यों छोड़ दिया गया? यह तो समझा जा सकता है कि इतिहास और पुराणों को श्रुति से

अंग्रेजी में यह 21 पृष्ठीय टाइप की हुई पाण्डुलिपि थी जिसका मूल शीर्षक ‘‘वेदों का दमन’’ है जिसमें लेखक ने त्रुटियों को स्वयं ठीक किया था। यह अध्याय पूर्ण है क्योंकि लेखक ने अंतिम पैरा अपने हाथ से सही किया था - संपादक