नौवीं पहेली: उपनिषद वेदों के अधीनस्थ कैसे बने? - Page 81

66 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है। परन्तु जो उपनिषदों के अनुगामी हैं, उन पर यह निर्देश लागू नहीं, जैसी कि शंकराचार्य ने व्याख्या की हैः

जिन्होंने वेद पढ़े हैं और कर्मकाण्ड के ज्ञाता हैं, वही यज्ञ करा सकते हैं। उनके लिए यज्ञ कराना निषिद्ध है जिन्होंने उपनिषदों से आत्मज्ञान अर्जित किया है। ऐसे ज्ञान की कर्मकाण्ड से कोई तुलना नहीं।

बादरायण का चौथा ख्1, मत है कि जिन्हें ब्रह्मनंद प्राप्त है उनके लिए कर्मकाण्ड वैकल्पिक है। जैसा कि शंकराचार्य ने स्पष्ट किया हैः

कुछ लोगों ने स्वतः ही कर्मकाण्ड का त्याग कर दिया है। बात यह है ज्ञान प्राप्ति

के उपरांत कुछ लोग दूसरों के सन्मुख उदाहरण प्रस्तुत करने हेतु कर्मकाण्ड करना

पसंद करते हैं जबकि कुछ उसका परित्याग कर देते हैं। जो आत्मज्ञानी होते हैं,

उनके लिए कर्मकाण्ड की बाध्यता नहीं होती।

उनकी अंतिम ख्2, और निर्णायक स्थिति इस प्रकार हैः

‘‘आत्मज्ञान कर्मकाण्ड का प्रतिरोधी है इसलिए वह कर्मकाण्ड का साधन नहीं है,’’ और इसके समर्थन में वे उन शास्त्रों का सहारा ख्3, लेते हैं जो संन्यास को चौथा आश्रम मानते हैं और संन्यासियों को कर्मकाण्ड द्वारा नियत यज्ञ से मुक्त रखते हैं।’’

बादरायण के सूत्रों में अनेक ऐसे हैं जो दोनों परम्पराओं के विद्वानों के परस्पर विरोधी विचारों को परिलक्षित करते हैं। परन्तु उपरोक्त में से एक ही पर्याप्त है, जिसकी अपनी विशेषता है। यदि कोई इस विषय की उपेक्षा कर दे तो स्थिति भिन्न हो जाती है। जैमिनि ने वेदांत को मिथ्याशास्त्र, भ्रमजाल और मोहमाया कहकर निंदा की है और उसे सतही, अनावश्यक तथा निराधार बताया है। इस लांछन के विरुद्ध बादरायण ने क्या किया? क्या उन्होंने जैमिनि के कर्मकाण्ड को मिथ्याशास्त्र, भ्रमजाल और मोहमाया कहकर उनकी निंदा की है, और उसे सतही, अनावश्यक तथा निराधार बताया है? नहीं! उन्होंने मात्र अपने वेदांत शास्त्रों का औचित्य ठहराया है। परन्तु उनसे और अधिक अपेक्षा थी। हम अपेक्षा कर सकते थे कि बादरायण भी जैमिनि के कर्मकाण्ड को मिथ्याधर्म कहेंगे। बादरायण में साहस नहीं है। इसके विपरीत उनका व्यवहार बगलें झांकने जैसा है। वे स्वीकार कर लेते हैं कि जैमिनि का कर्मकाण्ड शास्त्रों पर आधारित है और शास्त्र-प्रामाणिक तथा पवित्र हैं, जिनका खण्डन नहीं किया जा सकता।

  1. देखें, बादरायण सूत्र 15

  2. देखें, बादरायण सूत्र 16

  3. देखें, बादरायण सूत्र 17