दसवीं पहेली: ब्राह्मणों ने हिंदू देवताओं को एक-दूसरे से क्यों लड़ाया? - Page 85

70 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. वेद व्यास

  2. नरदेव

  3. राम

  4. कृष्ण

  5. बुद्ध

  6. कल्कि

दूसरी कथा सर्वप्रथम जन्म धारण करने की है। इसका उल्लेख स्कंद पुराण में है। कथा इस प्रकार है कि एक बार विष्णु देवी के वक्ष स्थल पर सो रहे थे। उनकी नाभि से एक कमल प्रकट हुआ और वह पुष्प जल की सतह पर आ गया। उसमें ब्रह्मा प्रकट हुए। उन्होंने जब यह देखा कि इस अनंत में कोई जीव नहीं है तो उन्होंने सोचा सर्वप्रथम वे ही उत्पन्न हुए हैं और इस प्रकार उन्होंने अपने को भावी सृष्टि से पूर्व जन्मा बताया। फिर भी यह निश्चय करने के लिए कि उनकी प्रमुखता को चुनौती कौन दे सकता है? उन्होंने कमल नाल को खींचा तो विष्णु को सोता हुआ पाया। उन्होंने जोर से पूछा ‘‘यह कौन है’’? विष्णु ने कहा मैं सबसे पहले जन्मा हूं, और जब ब्रह्मा ने अपने को पूर्व जन्मा बताया तो दोनों में युद्ध छिड़ गया। तभी महेश प्रकट हुए और कहा, पहले मेरा जन्म हुआ है। परन्तु मैं तुम दोनों में से किसी के लिए भी यह स्थिति त्यागने के लिए तैयार हूं यदि तुममे सें कोई मेरी शिखा तक अथवा मेरे पांवों के तलवे तक पहुंच जाए। ब्रह्मा तुरंत तैयार हो गए किन्तु वे थक गए थे पर बिना बात की बात पर अनिच्छुक हो गये इसलिए उन्होंने अपना दावा त्याग किया। वे महादेव की ओर मुड़े और कहा। उन्होंने बात पूरी कर दी है और उनके माथे का मुकुट देख लिया है और साक्षी के लिए प्रथम जन्मी गाय को बुला लिया। इस दर्प और झूठ पर शिव को क्रोध आ गया और उन्होंने कहा कि ब्रह्मा की कोई पूजा नहीं होगी और गाय का मुख विकृत हो जाएगा। फिर विष्णु आए और उन्होंने यह स्वीकार किया कि वे शिव के चरण नहीं देख पाए तब उन्होंने उनसे कहा कि देवों में वही प्रथम जन्में हैं और उनका पद सर्वोच्च है। इसके पश्चात् शिव ने ब्रह्मा का पाँचवा मुख काट डाला और उनका मौन भंग हुआ। उनकी शक्ति और प्रभाव क्षीण हो गए।

इस कथा के अनुसार ब्रह्मा का यह दावा झूठा था कि उनका जन्म सर्वप्रथम हुआ है। इसके लिए वह शिव के दण्ड के भागी बने। विष्णु को प्रथम जन्मा कहलाने का अधिकार मिला। ब्रह्मा के अनुयाइयों ने शिव की सहायता से विष्णु द्वारा ब्रह्मा का स्थान छीन लेने पर बदला लेने की ठानी। इसलिए उन्होंने एक और कथा रच डाली,