7. अराजकता कैसे जायज है? - Page 103

88 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

करते हैं, वे दास होते हैं- (नारद, 5.3.)

  1. ऋषियों ने कानून के आधार पर पांच वर्ग के सेवक बताए हैं, इनमें चार वर्ग के सेवक वे हैं जिनका ऊपर वर्णन किया गया है। पाचवें वर्ग में दास आते हैं, जिनके पंद्रह प्रकार हैं- (वही, 5.2)

  2. जो (अपने स्वामी के) घ में उत्पन्न हुआ है, जो खरीदा गया है, जो उपहार में मिला है, जो विरासत में मिला है, जिसका अकाल के समय भरण-पोषण किया गया है, जो उसके वैध स्वामी द्वारा गिरवी के रूप में रखा गया है-(वही, 5.26.)

  3. जिसको भारी ऋण चुकाकर मुक्त कराया गया है, जो युद्धबंदी है, जो दांव में जीता गया है, जो तपस्वी जीवन त्याग कर यह घोषित करता है, ‘मैं आपका हूं’ जो निश्चित अवधि के लिए दास है- (वही, 5.27.)

  4. जो जीविकोपार्जन के उद्देश्य से दास बनता है, जो दास स्त्री के साथ संबंध होने के कारण दास हो गया और जो स्वयं को बेच देता है। कानून के आधार पर ये पंद्रह के दास हैं- (वही, 5.28.)

  5. इनमें से प्रथम चार श्रेणी के दास स्वामी की सहमति के बिना मुक्त नहीं किए जा सकते। उनका दासत्व वंशानुगत है- (वही, 5.29)

  6. ऋषियों का कथन है कि ये सभी एक जैसे पराधीन होते हैं, परंतु इनका स्तर और इनकी आय इनकी विशिष् जाति और व्यवसाय पर निर्भर करती है- (वही, 5.4.)

विधि के समक्ष समानताः-

  1. जब दो व्यक्ति परस्पर अपशब्द कहें तब यदि वे एक ही जाति के हों, तो उनहें समान दंड दिया जाए। यदि एक ही जाति दूसरे से हीन है तो छोटी जाति वाले को दुगुना दंड दिया जाए और ऊंची जाति वाले को सामान्य दंड का आधा- (बृहस्पति, 20.5.)

  2. जाति और गुण में समान व्यक्ति एक-दूसरे को अपशब्द कहें तो कानून के अनुसार उन्हें साढ़े तेरह पण का अर्थदंड दिया जाए- (वही, 20.6)

  3. यदि ब्राह्मण को क्षत्रिय अपशब्द कहता है तो उस पर पचास पण का जुर्माना किया जाए, वैश्य को गाली देने पर पच्चीस पण और शूद्र को गाली देने