अराजकता कैसे जायज है?
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पर साढ़े बारह पण अर्थदंड दिया जाए- (वही, 20.7.)
यह दंड एक गुणशील शूद्र को (गाली) दिए जाने के लिए है, जिसका कोई दोष न हो। ब्राह्मण द्वारा गुणहीन (शूद्र) को अपशब्द कहने पर कोई अपराध नहीं बनता-(वही, 20.8)
यदि कोई वैश्य क्षत्रिय को अपशब्द कहता है तो उस पर एक सौ पण जुर्माना किया जाए। यदि क्षत्रिय वैश्य को अपशब्द कहे तो उसे आधा धन अर्थदंड के रूप में देना होगा- (वही, 20.9)
क्षत्रिय के संबंध में, यदि वह किसी शूद्र को अपशब्द कहता है तो उस (क्षत्रिय) पर बीस पण अर्थदंड किया जाए। वैश्य के संबंध में, यदि वह किसी शूद्र को गाली देता है तब कानून-विदों केमत में उस पर दुगुना अर्थदंड दिया जाए- (वही, 20.10)
शूद्र यदि वैश्य को अपशब्द कहता है तो उसे ऐसा करने पर प्रथम अर्थदंड देने के लिए बाध्य किया जाए। क्षत्रिय को गाली देने पर मध्यम और ब्राह्मण को (अपशब्द कहने पर) सर्वोच्च दंड दिया जाए- (वही, 20.11.)
ब््राह्मण से अपशब्द बोलने वाले क्षत्रिय को सौ पण, वैश्य को डेढ़ सौ या दो सौ पण और शूद्र को शारीरिक दंड दिया जाए- (मनु, 8.267.)
क्षत्रिय से अपशब्द बोलने वाले ब्राह्मण को पचास पण वैश्य को पच्चीस पण और शूद्र को बारह पण का दंड दिया जाए- (वही, 8.268.)
जो शूद्र द्विज को दारुण वचन कह उसकी अवमानना करता है, उसकी जीभ कटवा दी जाए क्योंकि वह नीच कुलोद्भव है- (मनु, 8.270.)
यदि वह द्विज का नाम और (उसकी) जाति का उल्लेख अपमान के तौर पर करता है तब उसके मुंह में दस अंगुल लंबी दहकती हुई कील डाल दी जाएµ(वही, 8.271.)
यदि वह ब्राह्माण को उद्दंडतापूर्वक उसके कर्तव्य की शिक्षा देता है तब राजा उसके मुख और कानों में खौलता हुआ तेल डलवाए- (वही, 8.272.)
ब्राह्मण और क्षत्रिय द्वारा एक-दूसरे को अपवचन कहने पर विवेकसंपन्न राजा द्वारा अवश्य अर्थदंड दिया जाए, जो ब्राह्मण के लिए सबसे कम और क्षत्रिय के लिए औसतन हो- (वही, 8.276.)
यदि नीच जाति का कोई व्यक्ति अपने किसी भी अंग से (तीन उच्च