7. अराजकता कैसे जायज है? - Page 105

90 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जातियों के) व्यक्ति को क्षति पहुंचाए तब उसका वह अंग कटवा दिया जाए, यही मनु की शिक्षा है- (वही, 8.279.)

  1. नीच जाति का जो व्यक्ति अपना हाथ या लाठी उठाए उसका हाथ कटवा दिया जाए, जो व्यक्ति गुस्से में अपनी लात से मारे उसकी वह लात कटवा दी जाए- (वही, 8.280.)

  2. नीच जाति का व्यक्ति यदि ऊंची जाति के व्यक्ति के आसन पर बैठने का प्रयत्न करे तब उसके नितंब को दगवा दिया जाए और उसे राज्य से निष्कासित कर दिया जाए या राजा द्वारा उसके नितंब में गहरा घाव करवा दिया जाए- (वही, 8.281)

  3. अगर वह उद्दंड हो (अपने से श्रेष् पर) थूक दे तब राजा उसके दोनों ओषें को कटवा देगा, अगर वह (उस पर) पेशाब कर दे तब राजा उसके शिशन को कटवा देगा, अगर वह (उसकी ओर) आपान वायु छोड़ दे तब उसकी गुदा को कटवा देगा- (वही, 8.282.)

  4. यदि वह अपने से श्रेष् को केश पकड़कर खीचे तब राजा निस्संकोच उसके दोनों हाथ कटवा देगा, इसी तरह अगर वह उसकी टांगें पकड़कर खीचे तब राजा उसकी दाढ़ी, गर्दन या अंडकोष कटवा देगा- (वही, 8.283.)

प्रत्येक वर्ण वर्ग की हैसियत, सम्मान और स्थान

  1. पुरुष के विषय में कहा जाता है कि वह नाभि के नीचे की अपेक्षा उसके ऊपर अधिक शुद्ध होता है, इसलिए स्वयंभू ने उसका मुख उसके शरीर में सबसे अधिक शुद्ध घोषित किया है- (मनु, 1.92.)

  2. च्ूंकि ब्राह्मण मुख से उत्पन्न हुआ, चूंकि वह सबसे पहले उत्पन्न हुआ और चूंकि उसे वेद प्राप्त हैं, इसलिए वह अधिकार से अपनी इस समस्त सृषि् का स्वामी है- (वही, 1.93.)

  3. च्ूंकि स्वयंभू ने तपस्या पूर्ण करने के बाद उसे अपने मुख से उत्पन्न किया जिससे पूजार्चना देवताओं और पितृगणों को भेजी जा सके और यह ब्रह्मांड संरक्षित रहे- (वही, 1.94.)

  4. कौन ऐसा सृजित जीव है जो उससे श्रेष् है जिसके मुख के माध्यम से देवता हव्य और पितृगण कव्य को ग्रहण करते हैं- (वही, 1.95.)