7. अराजकता कैसे जायज है? - Page 106

अराजकता कैसे जायज है?

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  1. समस्त सृषि् में वे सर्वश्रेष् हैं जो प्राणधारी हैं, प्राणियों में वे सर्वश्रेष् हैं, जिनकी जीविका का साधन बुद्धि है, बुद्धिजीवियों में मनुष्य सर्वश्रेष् है और मनुष्यों में (वे सर्वश्रेष् हैं) जो ब्राह्मण हैं- (वही, 1.96.)

  2. ब्राह्मण अस्तित्व में आने के बाद इस पृथ्वी पर सर्वश्रेष् के रूप में जनम लेता है, वह समस्त सृजित प्राणियों का स्वामी होता है- (वही, 1.99.)

  3. पृथ्वी पर जो कुछ भी है वह सब ब्राह्मणों का है। अपनी उत्पत्ति को उत्तम होने के कारण ब्राह्मण निश्चय ही सबका अधिकारी है- (वही, 1.100.)

  4. जिस प्रकार शास्त्र विधि से स्थापित अग्नि तथा सामान्य अग्नि-दोनों ही श्रेष् देवता हैं, उसी प्रकार ब्राह्मण चाहे मूर्ख हो या विद्वान दोनों ही रूपों में महान है- (वही, 9.317.)

  5. यद्यपि ब्राह्मण सभी प्रकार के शुद्ध कर्मों में प्रवृत्त होते हैं, तथापि वे हर प्रकार के पूजनीय हैं क्योंकि वे महान देवता हैं- (वही, 9.319.)

  6. और (पिता) अपने बालक के जन्म के दसवें या बारहवें दिन या शुभ तिथि पर शुभ मुहुर्त में शुभ ग्रहों का योग होने पर बालक का नामकरण संस्कार कराए- (वही, 2.30.)

  7. ब्राह्मण के नाम का पहला भाग ऐसा हो जो (कुछ) मंगलकारी होने का सूचक हो, क्षत्रिय का शक्ति से संबंधित और वैश्य का संपत्ति से संबंधित हो, लेकिन शूद्र का (कुछ ऐसा हो) जो घृणा योग्य हो-(मनु, 2.31.)

  8. ब्राह्मण के नाम का दूसरा भाग ऐसा (शब्द) होगा जिसमें सुख का भाव निहित हो, क्षत्रिय के नाम का दूसरा भाग ऐसा (शब्द) होगा जिसमें रक्षा करने का भावि निहित हो और वैश्य का ऐसा (शब्द) होगा जिसमें समृद्धि का भाव निहित हो तथा शूद्र का ऐसा होगा जिससे सेवा करने का भाव व्यक्त हो- (वही, 2.32.)

  9. वह (ब्राह्मण) ऐसे देश में निवास न करे जहां के शासक शूद्र हों, न ही (ऐसे देश में निवास करे) जहां कदाचारी व्यक्तियों का बाहुल्य हो, न ही (ऐसे देश में निवास करे) जहां अपधर्म व्याप्त हो, न ही (ऐसे देश में निवास करे) जहां निम्नतम जातियां भरी पड़ी हों- (वही, 4.61.)

  10. जब राजा स्वयं (किसी न्यायिक विवाद के) कारणों के संबंध में निर्णय न कर सके तब उसे चाहिए कि वह इस कार्य के लिए किसी ब्राह्मण को नियुक्त करे जो विभिन्न शास्त्रों का विद्वान हो- (कात्यायन, 6.3.)