94 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
यदि किसी शूद्र ने द्विज जाति की रक्षित या अरक्षित स्त्री के साथ संभोग किया है, तब उसे इस प्रकार दंड दिया जाएः यदि वह अरक्षित थी, तब उसका लिंग कटवा दिया जाए और उसकी समस्त संपत्ति छीन ली जाएः यदि वह रक्षित थी, तब उसका सब कुछ छीन लिया जाए (उसका जीवन भी)- (वही, 8.374.)
रक्षित ब्राह्मणी के साथ संभोग करने पर वैश्य की समस्त संपत्ति उसे एक वर्ष तक कारागार में रखने के बाद जब्त कर ली जाए, क्षत्रिय को एक सहस्त्र (पण) का अर्थदंड दिया जाए और उसका सिर (गधे के) मूत्र से मुंडवा दिया जाए- (वही 8.375.)
अगर कोई वैश्य या क्षत्रिय किसी अरक्षित ब्राह्मणी के साथ संभोग करता है तब वह वैश्य पर पांच सौ पण और क्षत्रिय पर एक सहस्त्र पण का अर्थदंड करे- (वही, 8.376.)
यदि कोई वैश्य किसी क्षत्रिय की रक्षित स्त्री के साथ या कोई क्षत्रिय किसी वैश्य की रक्षित स्त्री के साथ संभोग करे, तब ये दोनों वैसा ही दंड पाने के योग्य हैं, जैसा कि किसी अरक्षित ब्राह्मणी के प्रसंग में दिया जाता है- (मनु, 8.382.)
यदि किसी ब्राह्मण ने इन दोनों (जातियों की) रक्षित स्त्रियों के साथ संभोग किया है तब उसे अर्थदंडस्वरूप एक सहस्त्र पण देने के लिए बाध्य किया जाए। शूद्र (रक्षित) स्त्री के साथ (संभोग करने पर) क्षत्रिय या वैश्य को भी एक सहस्त्र पण का अर्थदंड दिया जाए- (वही, 8.383.)
अरक्षित क्षत्रिय स्त्री के साथ संभोग करने पर वैश्य को पांच सौ पण का अर्थदंड दिया जाए, किंतु (ऐसा ही अपराध करने पर) क्षत्रिय का सिर (गधे के) मूत्र से मुंडवा दिया जाए या उसे उतना ही अर्थदंड दिया जाए- (वही, 8.384.)
यदि कोई ब्राह्मण क्षत्रिय या वैश्य (जातियों की) अरक्षित स्त्रियों या शूद्र स्त्री के साथ संभोग करता है तब उसे पांच सौ (पण) का अर्थदंड दिया जाए, लेकिन निम्नतम (जातियों की) स्त्री के साथ संभोग करने पर एक सहस्त्र पण अर्थदंड जाए- (वही, 8.385.)