8. विदेश के तदनुरूप उदाहरण - Page 120

विदेश के समान उदाहरण

105

आवाज सुनाई पड़ जाती है, तो हमें बहुत गुस्सा आ जाता था। ...हम अक्सर उसकी खूब पिटाई करते थे। उसके हाथ-पैर या दांत तोड़ देते थे। एक अमीर रोमवासी अपने गुलाम को उसकी लापरवाही पर मछलियों के पोखर में धकेल देता था, जिससे लेम्प्रे मछलियां उसे नोच-नोचकर खा लें। जो गुलाम अपने स्वामी को अप्रसन्न कर देता था तो उसे सजा के तौर पर तहखाने में बंद कर दिया जाता था। सारा दिन उन्हें भारी-भारी जंजीरों में बंधें-बंधें काम करना पड़ता था। कई गुलामों को गर्म सलाखों से दाग दिया गया था। रोम के एक लेखक ने एक मिल का वर्णन जहां इन दासों को काम करना पड़ता था, इन शब्दों में किया हैः

हे भगवना! ये ठठरियां भी क्या कोई इंसान है? इनकी चमड़ी कोड़ों की

मार से उधड़ी पड़ी है। शरीर चिथड़ों में लिपटा हुआ है, सारा शरीर मुड़ गया

है, सिर मुंडा हुआ है, पैरा में सांकले पड़ी हुई है, आग की गर्मी से शरीर

टेढ़ा-मेढ़ा हो गया है, पलकें आग की लपटों से झुलसी हुई हैं और पूरे शरीर

पर भूसी लिपटी हुई है।

किसी समय में अंग्रजों के समाज में भी सेवक वर्ग हुआ करता था। यह जानने के लिए कि नारमनों की विजय के समय अंग्रेजों के समाज की क्या दशा थी। हमें ‘डूम्सडे’ पुस्तक के पृष् उलटने होंगे। इस पुस्तक में इंग्लैंड की भूमि व्यवस्था और विभिन्न प्रकार के किसानों का सामाजिक सर्वेक्षण किया गया है, जैसी कि विजेता विलियम ने 1806 में अपनी विजय के तुरंत बाद यहां स्थापित की थी। इस पुस्तक में उस समय की आबादी के निम्नलिखित वर्ग बताए गए हैंः

  1. सामंतों के नीचे ← सर्वोच्च पट्टेदार 1,400

भद्र लोगों का वर्ग 9,300 और पादरी } ← { अधीनस्थ पट्टेदार 7,900 }

  1. भूमिधर ← मुक्त गुलाम 12,000 44,000 छोटा भूमिधर } ← { खिदमती काश्तकार 32,000 }