8. विदेश के तदनुरूप उदाहरण - Page 121

106 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. अर्ध-मुक्त ← अर्ध-गुलाम 1,69,000

या 25,9000 अमुक्त } ← { झोंपड़ी में रहने 90,000 }

के बदले काम करने

वाले किसान

  1. गुलाम 25,000

कुल 3,37,000 की जनसंख्या में 2,84,000 लोग या तो अमुक्त थे या फिर गुलाम थे।

वह कुछ ऐसा सेवक वर्ग था, जो नस्ल या धर्म पर आधारित नहीं था। लेकिन इतिहास में धर्म और नस्ल के आधार पर बने सेवक वर्ग के कई उदाहरण मिलते हैं। इनमें यहूदी मुख्य थे। ईसाइयों के इस विश्वास के आधार पर कि ईसा की मृत्यु यहूदियों के कारण हुई, यहूदियों को सताया जाता रहा है। मध्य-काल में यूरोप के सभी शहरों में यहूदियों को सीमित क्षेत्र में रहने के लिए मजबूर किया जाता था, और यहूदियों के ये निवास-क्षेत्र ‘घेट्टों’ कहलाते थे। 1050 में आस्ट्रेलिया में कोएंजा में हुई ईसाइयों की एक महासभा में अधिनियमित किया गया कि कोई भी ईसाई किसी मकान में यहूदी और मूर (हब्शी) लोगों के साथ नहीं रहेगा और न उनके साथ भोजन करेगा, और जो कोई इस नियम को तोड़ेगा, वह सात दिन तक प्रायश्चित करेगा। यदि कोई व्यक्ति उच्च पदाधि कारी होकर ऐसा करने से इंकार कर दे तो उसका एक साल तक सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाए। यदि कोई साधारण व्यक्ति यह अपराध करे तो उसे एक सौ कोड़े लगाए जाएं। 1388 में फैलेनशिया में हुई महासभा में एक नियम बनाया गया कि ‘ईसाई उन घरों में न रहें, जो यहूदियों के लिए निर्धारित हैं, और जो वहां रह रहे हों, वे प्रमुख चर्च के द्वारा इस आदेश के जारी होने के दो महीने के भीतर वहां से हट जाएं’ और यदि वे ऐसा नहीं करेंगे तो उन्हें पादरियों द्वारा प्रताडि़त किया जाए। मध्य-काल में यहूदी इकट्ठे होकर एक जगह स्नान करते थे। स्नान करने के लिए और कोई दूसरा उपाय भी नहीं था। इसका कारण यह था कि ईसाई जिन नदियों में नहाते थे वहां राज्य की ओर से यहूदियों का नहाना वर्जित था। चौहदवीं शताब्दी में औगर्स के यहूदियों को बहुत कठोर शर्तों पर नगर में फिर से रहने की इजाजत दी गई थी। इन शर्तों में एक शर्त यह थी