विदेश के समान उदाहरण
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कि वे माईन नदी में स्नान नहीं कर सकते। राज्य द्वारा यहूदियों पर कुछ कर भी लगाए गए। ये कर तीन प्रकार के थे- ‘व्यक्ति कर’, व्यक्तिगत लेन-देन और विशेषाधिकारों पर विशेष प्रकार का जुर्माना और शुल्क। किस उम्र में यहूदी स्त्री या पुरुष ‘व्यक्ति कर’ का भुगतान शुरू कर देगा, उसमें बहुत अंतर था, किंतु यह उम्र बहुत कम होती थी। 1273 में इंग्लैंड की तरह स्पेन में भी दस साल की उम्र के यहूदियों को यह कर देना पड़ता था। शांति-काल में यहूदियों के घरों में सिपाहियों को जबरदस्ती रख उनसे धन वसूलना तो आम बात थी। मध्य-काल में जगह-जगह यहूदियों से इस प्रकार धन वसूल करने के असंख्य उदाहरण मिलते हैं। 1215 में पोप इनोसेंट तृतीय ने एक फरमान जारी किया कि ईसाइयों से अलग अपनी पहचान के लिए यहूदी बाहर अपने कपड़ों के ऊपर एक बिल्ला लगाया करेंगे। लेटरनन परिषद ने स्पष् रूप से इस बात पर बल दिया कि यहूदी बिल्ला लगाएंगे, किंतु उसका विवरण नहीं बताया गया। उसने यह बात स्थानीय गवर्नरों और सरकारों पर छोड़ दी कि वे निश्चित करें कि उस अपमानजनक बिल्ले की छाप, रंग और आकार क्या होगा। प्रत्येक गवर्नर और सरकार ने अपनी मर्जी से बिल्लों का रंग और आकार निश्चित कर दिया। उन बिल्लों के रंग और आकार इतने बदले कि वे निरर्थक हो गए और यहूदियों ने ये बिल्ले लगाने छोड़ दिए। चूंकि बिल्ले अक्सर छिप जाया करते थे, इसलिए 1525 में पोप क्लीमेंट सप्तम ने यह व्यवस्था कर दी कि यहूदी अब पीला हैट या बोनेट पहना करेंगे।
अस्पृश्यों की मौजूदा स्थिति के दौरान किसी जमाने में इंग्लैंड के कैथोलिक ईसाइयों की स्थिति की याद आने लगती है। कैथोलिक ईसाइयों पर अनेक प्रकार की पाबंदियां थीं और उन्हें अनेक कष् भुगतने पड़ते थे। इनकी सूची निम्नलिखित हैः
- मौजूदा कानून के अनुसार कैथोलिक ईसाइयों के विवाह या ऐसे सभी
विवाह गैर-कानूनी हैं, जो कैथोलिक पादरियों के द्वारा संपन्न कराए जाते हैं।
इसके फलस्वरूप उस पक्ष को जिसका त्याग किया जाता है, चाहे उसका कारण
कुछ भी क्यों न हो, स्थानीय चर्च से या अपने देश के राज्य की सरकार से
कुछ भी हरजाना नहीं मिलेगा। यह विधान भी है कि इस अपराध के लिए
उस पादरी को देश निकाला दे दिया जाए या उसे जेल में डाल दिया जाए या
उसे निर्जन स्थान में भेज दिया जाए।
- मौजूदा कानून के अनुसार चूंकि कैथोलिक पादरियों के भरण-पोषण