110 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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[ निम्नलिखित निबंध की मूल अंग्रेजी पाठ की (प्रति श्री एस. एस. रेगे से प्राप्त हुई थी। चूंकि यह ‘नीग्रो और गुलाम-प्रथा’ (इस अध्याय की योजना के विषयों में से एक विषय) के बारे में है जिस पर उक्त विवेचन में कोई चर्चा नहीं हुई है, अतः इसे यहां सम्मिलित किया गया है- संपादक ]
ऐसा लगता है कि विधाता ने अफ्रीका महाद्वीप के साथ स्थाई रूप से संधि कर उसके भाग्य में लिख दिया है कि वह एशिया और यूरोप के स्वतंत्र और सभ्य निवासियों के लिए गुलामों की एकमात्र जन्मस्थली रहेगा। अमरीका में यूरोपियनों द्वारा गुलाम के रूप में नीग्रो लोगों का आयात शुरू करने के पूर्व निवासियों द्वारा एशिया में नीग्रो लोगों का आयात किया जाता था। हालांकि स्थिति यही थी। लेकिन अमरीका में और अंग्रेजों की नई बस्तियों में नीग्रो लोगों को किस तरह गुलाम बनाकर रखा जाता था, इसका बड़ा ही कारुणिक इतिहास है, जिसे सुनकर लोग एशिया में गुलाम के रूप में नीग्रो लोगों के आयात की कथा को भूल जाते हैं, और यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि अमरीका में नीग्रो लोगों का यूरोप के निवासी किस प्रकार आयात करते थे, यह सब एक बहुत ही वीभत्स कार्य होता था। यह आयात 16वीं शताब्दी के पहले दशक में शुरू हुआ और 19वीं शताब्दी के मध्य तक चला।
कोलंबस जब पहली बार 1492 में बहामा द्वीप पर पहुंचा, तब उसके बाद आधी शताब्दी में स्पेनवासियों ने मेक्सिको से पेरु होते हुए युरुगुए तक के विशाल भू-भाग को जीत लिया था और उन्होंने अंशतः इस पर कब्जा भी कर लिया था। इसमें बड़े-बड़े वेस्ट इंडियन द्वीप भी शामिल थे। पुर्तगालियों ने ब्राजील में 1531 में अपनी बस्तियां बसानी शुरू की थीं। पुर्तगालियों और स्पेनवासियों ने यहां आते ही अपने-अपने अधीन के क्षेत्रों की प्राकृतिक संपदा का दोहन करना शुरू कर दिया, मुख्य भू-भाग में स्थित सोने और चांदी की खानों का पता लगाना और उन्हें
खोदना शुरू कर दिया और द्वीपों की उपजाऊ भूमि पर तंबाकू, नील और गन्ने की खेती शुरू की। लेकिन उनको तुरंत अपेक्षित संख्या में श्रमिकों की पूर्ति की समस्या का सामना करना पड़ गया। उन्हें पर्याप्त संख्या में श्रमिक चाहिए थे। वहां पर श्वेत श्रमिकों की मजदूरी ज्यादा थी और यूरोपवासी वहां की उष्णकटिबंधीय तेज धूप बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। अतः वहां यूरोपवासियों को स्वयं काम करने में कष् होता था। वहां पर गैर-यूरोपीय श्रमिक के रूप में वहां के स्थानीय लोग