8. विदेश के तदनुरूप उदाहरण - Page 129

114 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वर्जीनिया में जेम्सटाउन में आगमन। यह जहाज जेम्स नदी तक गया और इसमें ये नीग्रो अमरीका में वर्जीनिया की प्रथम सफल बस्ती के सभ्य साहसिकों के उपयोग के लिए लाए गए थे। इस प्रकार अमरीका में नीग्रो लोगों और पिलग्रिम फादर्स को लाया गया, जो वहां एक ही समय में आए। पिलग्रिम फादर्स का उद्देश्य उनकी स्वतंत्रता की सुरक्षा करना और नीग्रो का उद्देश्य अपनी स्वतंत्रता को गंवाना था। जहां तक संख्या का संबंध है, अमरीका की इन नई बस्तियों की जनसंख्या में नीग्रो लोगों की कुछ समय तक प्रमुखता रही। वास्तविक अर्थ में अमरीका और उसके द्वीपों को मुख्यतः अफ्रीका से आए लोगों और नीग्रो लोगों ने बसाया। 1800 से पहले तक अमरीका में जितने नीग्रो लोगों को लाया गया, उनकी संख्या वहां पर सभी यूरोपियनों की कुल संख्या से बीस गुनी से भी अधिक थी। यह अपरिहार्य था। यूरोप की जनसंख्या कम थी। यह लंबी-लंबी लड़ाइयों के कारण और भी घट गई थी, और यह अपनी पिछड़ी हुई संस्कृति से उभर रहा था। यहां जो नीग्रो आयात किए गए उनकी हैसयित बहुत समय तक अनिश्चित रही। डच लोग जिन बीस नीग्रो लोगों को लाए थे और जो जेम्सटाउन में उतरे थे, उन्हें बस्ती में तुरंत गुलाम की संज्ञा नहीं दी गई। उन्हें उसी आधार पर स्वीकार किया गया, जैसे कि वे ठेके पर रखे गए नौकर हों। यह पता चला है कि वर्जीनिया नामक बस्ती के 1624 और 1625 के मस्टर रोलों में तेईस नीग्रो लोगों के नाम दर्ज थे, जिनमें से सभी नीग्रो उसी श्रेणी के श्वेत लोगों की तरह ‘सेवक’ के रूप में दर्ज थे। यह भी लिखा मिलता है कि बीस नीग्रो लोगों के आगमन के चौंतीस वर्ष बाद इनमें से एक एंथनी जॉनसन नामक नीग्रो ने न्यायालय से अपने समर्थन की पुषि् के संबंध में यह आदेश प्राप्त किया कि जॉन कैस्टर नामक एक दूसरे नीग्रो की सेवाओं पर उसका स्थाई अधिकार है। गुलामी की परिभाषा पचास वर्ष तक निश्चित नहीं हुई और जिन उपायों से यह निश्चित हुई, वे बहुत धीरे-धीरे किए गए।

शुरू-शुरू में सेवा के संबंध में एक कानून होता था जो सभी सेवकों पर चाहे वे नीग्रो हों या श्वेत, लागू होता था। ज्यों-ज्यों समय बीतता गया त्यों-त्यों नीग्रो सेवकों और श्वेत सेवकों के साथ व्यवहार में अंतर किया जाने लगा। यह भेद इन बाहरी और विधर्मी लोगों के भय के कारण किया जाने लगा जो परंपरा और रीति-रिवाजों में रचते-पचते जा रहे थे। इस भय के कारण धीरे-धीरे अफ्रीकावासियों की हैसियत में संशोधन हुआ और जो नीग्रो सेवक कहे जाते थे, उन्हें नीग्रो गुलाम कहा जाने लगा। बाद में ज्यों-ज्यों स्थिति बदलती गई, त्यों-त्यों सेवकों से संबंधित कानून और रीति-रिवाजों में संशोधन होते रहे, और अमरीका की इन विदेशी बस्तियों में