विदेश के समान उदाहरण
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नीग्रो लोगों को गुलाम के रूप में रखने की प्रथा का विकास होता गया। सेवक से गुलाम के रूप में यह अंतरण दो चरणों में पूरा हुआ। इस अंतरण का पहला चरण वह है, जब नीग्रो लोगों को आजन्म सेवक के रूप में रखने की प्रथा को मान्यता दी गई। जैसा कि कहा जाता है, गुलाम होने का लक्षण यह नहीं है कि किसी की राजनैतिक या नागरिक स्वतंत्रता छिन जाती है, बल्कि इस क्षति का स्थाई और अंतिम होना है जो चाहे स्वैच्छिक हो या अनैच्छिक हुई हो। यह अन्य प्रकार के दासत्व, जैसे मध्य-कालीन गुदस्तादार (वैसेलेज) और अर्ध-गुलाम (विलियनेज) तथा आधुनिक खेतिहर गुलाम (सर्फडम) और द्रव्य के बजाय मात्रानुसार तकनीकी सेवक (सर्वीट्यूड) से भिन्न होता है जो स्थान या काल के आधार पर सीमित होता है। खेती करने वाले मालिक अपने श्वेत सेवकों की सेवा-अवधि बढ़ाने के प्रयत्न में तो सफल नहीं हो सके, लेकिन इन ‘अश्वेत’ लोगों के मामले में वे सफल हो गए। उनके प्रयत्नों को सार्वजनिक आधार पर समर्थन मिला क्योंकि इन ‘अश्वेत’ लोगों के बारे में यह धारणा हो गई थी कि अगर इन्हें नियंत्रण में नहीं रखा गया तो ये खतरनाक हो जाएंगे।
नीग्रो सेवकों को नीग्रो गुलाम के रूप में बदलने के लिए दूसरा उपाय यह किया गया कि गुलाम नीग्रो मां की अवधि को बढ़ा दिया गया और उसके बच्चों को भी गुलाम बना दिया गया। यह स्वाभाविक भी था, क्योंकि नीग्रो मां को अपने अधीन गुलाम बनाकर रखने से उसके बच्चों पर भी उसके मालिक का नियंत्रण हो जाता था। यह स्पष् है कि इन बच्चों के मां-बाप जीवन-भर गुलाम रहने के कारण अपनी संतान के पालन-पोषण के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर सकते थे, और इनका पालन-पोषण भी मालिक पर निर्भर करता था। इस कारण इन बच्चों पर स्वतः मालिक का अधिकार हो जाता था। यह परिवर्तन कानूनी रूप में आने के बहुत पहले रीति-रिवाज के रूप में हो गया था। कानून के रूप में इसे अमरीका के विभिन्न राज्यों में 1662 से 1741 के बीच लागू किया गया।
इस प्रकार नीग्रो गुलाम बन गए जो मूलतः केवल सेवक होते थे। ध्यान देने की बात यह है कि अफ्रीका में, जो नीग्रो लोगों की जननी रहा है, गुलाम-प्रथा वहां की मूल संस्था थी और बहुत पुरानी थी। दासत्व की सबसे अधिक प्रचलित विधियां ये थीं - (1) जन्म से ही गुलाम होने से, (2) कर्ज के बदले गुलाम के रूप में बिकजाने से, (3) युद्ध में पकड़े जाने पर गुलाम बना दिए जाने से, और (4) आपसी वैर या लोभ से प्रेरित होकर किसी का अपहरण कर उसे गुलाम के रूप में बेच दिए जाने से। नीग्रो वस्तुतः गुलाम-प्रथा से पूरी तरह हिले-मिले