8. विदेश के तदनुरूप उदाहरण - Page 132

विदेश के समान उदाहरण

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इन्हें काफी दूर तक चलना पड़ता। आमतौर पर इनके पैरों में बेडि़यां पड़ी होतीं, जिससे वे बचकर भागने न पाएं। कभी-कभी इनके गले में भी छल्ला (तौक) डाल दिया जाता था। यह छल्ला एक छड़ से एक लंबे पोल से बांध दिया जाता था, जो ‘स्लेव स्टिक’ कहलाती थी। इन्हें अपने-अपने सिर पर खाने की सामग्री और रास्ते के लिए जरूरी अन्य सामग्री, हाथी दांत या अन्य स्थानीय रूप से उपलब्ध माल भी ढोना पड़ता था, जो उनके खरीददार ने खरीदा होता था। यात्रा यह कठोरताएं कमजोर नीग्रो लोगों को बहुत भारी पड़तीं। जो गुलाम रास्ते में बीमार पड़ जाते, उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाता या उन्हें अपनी मौत मरने के लिए वैसा ही छोड़ दिया जाता। जिन रास्तों से ये गुलाम अक्सर ले जाए जाते थे, उन रास्तों पर इधर-उधर नर-कंकाल या उसकी हड्डियां पड़ी मिलतीं। तट पर पहुंचने पर इनको गुलामों वाले जहाजों पर भर दिया जाता, जो इनको ले जाने के लिए खासतौर से बनाए गए होते थे। जहाज के अंदर माल रखने वाली जगह को तीन-तीन फुट के अंतर पर आड़े तख्ते रख, बांट दिया जाता था, जिन्हें ‘डेक’ कहते हैं। इनके बीच सीढ़ी होती थी। इस तरह जो खाने बने होते, उनमें इन गुलामों को दो-दो की संख्या में बेड़ी पहना कर लिटा दिया जाता था। आदमियों और औरतों को अलग-अलग रखा जाता था। जहाज में जितने ज्यादा गुलाम भरे होते, उतना ज्यादा लाभ होता। इसलिए इनको ठूंस-ठूंसकर इस तरह भरा जाता कि ये मुश्किल से करवट ले सकते थे। एक सौ पचास टन वाले जहाज में छह सौ तक गुलाम भरे जाते थे। अफ्रीकी के तट से ब्राजील तक का रास्ता छोटा था, लेकिन यहां से वेस्टइंडीज तक के तथाकथित ‘मिडिल पैसेज’ को जो इन गुलामों के वितरण का मुख्य केंद्र था, खराब मौसम और तेज हवाओं के कारण तय करने में कई हफते लग जाते। अगर मौसम अच्छा होता, तब गुलामों को ऊपर ‘डेक’ पर लाया जाता और उन्हें व्यायाम के लिए नाचने को कहा जाता या उन्हें जबरदस्ती नचाया जाता था। ये अक्सर बीमार रहते और जो लोग खाना बंद कर देते, उनको जबरदस्ती खिलाने के औजार इन जहाजों पर रहते। लेकिन 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्वीकार किया गया कि औसतन इन गुलामों में से इनकी संख्या का छठा भाग इस समुद्री यात्रा में ही मर जाता था। जब यह मात्रा खत्म होती तब इन गुलामों की जांच होती और ये बेचे जाने के लिए तैयार किए जाते। तूफान या इनको ठीक तरह न रखने पर इनके जो जख्म हो जाते, उनकी मरह-पट्टी कर दी जाती। लेकिन जहां तक मुमकिन होता, इन जख्मों को छिपा दिया जाता। लेकिन बंदरगाहों पर एजेंट लोगों की अक्सर यही शिकायत रहती कि इन पार्सलों में जो नीग्रो माल आया है, वह