120 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अमरीका में प्रभाव यह हुआ कि न्यायपूर्ण दंड के फलस्वरूप यदि कोई नीग्रो कभी मर जाता, तो कानून उसे संयोग से हुई घटना मात्र मानता था। दंड देने के इस अधिकार का मालिकों ने कितनी निर्दयतापूर्वक प्रयोग किया वह 1787 में एंटीगिना के एक निवासी द्वारा लिखे गए पत्रों के उद्धरणों को पढ़कर अनुभव किया जा सकता है। लेखक कहाता हैः
नीग्रो लोगों को पौ फटते ही उठा दिया जाता है और बीस से साठ तक या
उससे भी अधिक संख्या में टोलियां बनाकर उन्हें श्वेत निरीक्षकों की देख-रेख
में काम पर लगा दिया जाता है। ये लोग यहां कभी स्कॉटलैंड से आकर ठेके
पर मजदूर के रूप में काम करते थे, और अपनी लगन और मेहनत से इन
बागानों में अक्सर हाकिम बन जाते थे। इन हाकिमों के नीचे इन नीग्रो लोगों से
काम कराने वाले होते। ये लोग अधिकतर अश्वेत होते थे, या गोरी व काली
नस्ल के भद्दी शक्ल के वर्णसंकर होते हैं। इनको काम पर होते समय कोड़े
दिए जाते हैं, जिनसे वे लोगों को दंडित कर सकें, और उन्हें नीग्रो लोगों को
जब कभी उन्हें काम में ढिलाई करते देखें, तब उन्हें इन्हीं कोड़ों से मारने
का पूरा अधिकार होता है, उन्हें इस बात का कोई ख्याल नहीं रहता कि यह
ढिलाई, सुस्ती या थक जाने के कारण है न ही वे इस बात का ख्याल करते
हैं कि नीग्रो की उम्र क्या है, या वह पुरुष है या स्त्री। बारह बजे उन्हें अंदर
कर लिया जाता है (अर्थात् काम पर से छुट्टी मिल जाती है) जिससे वे फिर
काम करने के लिए हरे-भरे हो सकें, साढ़े बारह बजे घंटी बजती है तब वे
बाहर निकल पड़ते हैं और अपने काम पर तब तक लगे रहते हैं, जब तक
सूर्यास्त नहीं हो जाता।
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इस द्वीप पर गुलामों को जो दंड दिया जाता है, वह तरह-तरह का और
अत्यंत यातनापूर्ण होता है। इनमें एक है ‘थंबस्कू’ अर्थात् अंगूठों को एक-दूसरे
पर रखकर मशीन द्वारा दबाना जिससे मर्मान्तक वेदना होती है। ‘लोहे की
नेकलेस’ एक तरह का बड़ा छल्ला होता है, जिसे ‘लॉक’ करने के बाद गले
में डाल दिया जाता है, अक्सर इसके बाद एक और छल्ला डाल दिया जाता
है इसे गले में डाल देने के बाद पहनने वाला अपना सिर इधर-उधर मोड़ नहीं
सकता है। इनके ‘बूट’ भी लोहे के लंबे पाइन सरीखे होते हैं, इनका घेरा पूरे
चार इंच का होता है और वे घुटनों तक आते हैं। इन गुलामों को ये बूट अवश्य
पहनने पड़ते हैं और इन्हें पहन कर ही काम करना पड़ता है। दोपहर के समय