124 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विशिष् व्यवसाय से जीविकोपार्जन करें-(वही, 10.50.) 3. लेकिन चांडालों और श्वपचों के घर गांव के बाहर होंगे और उन्हें अपपात्र
बनाया जाना चाहिए और उनकी संपत्ति कुत्ते और गधे होंगे-वही, (10.
51.)
- मृतक के वस्त्र इनके वस्त्र होंगे, वे टूटे-फूटे बर्तनों में भोजन करेंगे,
उनके गहने काले लोहे के होंगे और वे एक स्थान से दूसरे स्थान पर
आते-जाते रहेंगे-(वही, 10.52.)
- धर्म का आचरण करने वाला व्यक्ति इन लोगों के साथ व्यवहार न रखे
और उनके व्यवहार उनके अपने ही समुदाय में होंगे और विवाह समान
व्यक्तियों के साथ ही होंगे- (वही, 10.53.)
- उनका भोजन (आर्य दाता के अतिरिक्त) अन्य के द्वारा टूट-फूटे बर्तन
में दिया गया होगा, रात्रि के समय वे गांवों और नगरों के आस-पास
नहीं जाएंगे- (वही, 10.54.)
- दिन में वे, राजा के द्वारा चिह्नों से अंकित हो जिससे वे अलग-अलग
पहचाने जा सकें, अपने-अपने काम के लिए जाएंगे और उन व्यक्तियों
के शवों को ले जाएंगे जिनके कोई सगे-संबंधी नहीं हैं, यही शास्त्र-सम्म्त
मर्यादा है- (वही, 10.55.)
- वे राजा का आदेश होने पर अपराधियों का वध कानून में विहित विधि
के अनुसार हमेशा करेंगे और वे अपने लिए (ऐसे) अपराधियों के वस्त्र,
शैया और आभूषण प्राप्त करेंगे- (वही, 10.56.)
- जो भी व्यक्ति निम्नतम जातियों की किसी स्त्री के साथ संबंध रखता
है, उसका वध कर दिया जाएगा-(विष्णु 5.43.)
- अगर कोई व्यक्ति जिसको (चांडाल या किसी अन्य निम्न जाति का होने
के कारण) स्पर्श नहीं किया जाना चाहिए, जान-बूझकर अपने स्पर्श से
ऐसे व्यक्ति को अपवित्र करता है, जो द्विज जाति का होने के कारण
(केवल द्विज व्यक्ति द्वारा ही) छुआ जा सकता है, तो उसका वध कर
दिया जाएगा- (विष्णु, 5.10.)
क्या कोई व्यक्ति मनु की इन व्यवस्थाओं को पढ़कर यह इंकार कर सकता है कि हिंदुओं में अस्पृश्यता की भावना को चिरस्थाई बनाने और अस्पृश्यों के प्रति