10
हिंदू और उनके सामाजिक
विवेक का अभाव
जो भी व्यक्ति अस्पृश्यों की दयनीय स्थिति से दुखी होता है तो वह यह कहकर शुरू करता है, ‘हमें अस्पृश्यों के लिए कुछ करना चाहिए।’ लेकिन इस समस्या को जो लोग हल करना चाहते हैं, उनमें से शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जो यह कहता हो कि ‘हमें हिंदुओं को बदलने के लिए भी कुछ करना चाहिए।’ यह धारणा बनी हुई है कि अगर किसी का सुधार होना है तो वह अस्पृश्यों का होना है, मानो अस्पृश्यता उनके भ्रष् होने के कारण है और अपनी हालत के लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं। हम अपना जो भी लक्ष्य बनाएं, वह अस्पृश्यों के लिए हो। हिंदू के बारे में कुछ भी नहीं किया जाना है। उनकी भावनाएं, आचार-विचार और आदर्श उच्च हैं। वे पूर्ण हैं, उनमें कहीं कोई खोट नहीं है। वे पापी तो हैं ही नहीं।
असलियत क्या है? यह तर्क कि हिंदुओं में कोई दोष नहीं है और अस्पृश्य जो कष् झेलते हैं, उसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं, ठीक वैसा ही है, जैसा कि यहूदियों के साथ अमानवीय व्यवहार करने पर अपने बचाव में ईसाई देते हैं। श्री लुइस गोल्डिंग ने इन यहूदियों की तरफ से ईसाइयों को करारा जवाब दिया है। यहूदियों की समस्या के मूल का विवेचन करते हुए लुई गोल्डिंग का कहना हैः
‘‘मैं जिस अर्थ में यहूदियों की समस्या को असलियत में ईसाई समस्या
समझता हूं, उसको स्पष् करने के लिए एक बहुत ही सीधी-सी मिसाल देता
हूं। मेरे ध्यान में मिश्रित जाति का एक आयरिश शिकारी कुत्ता आ रहा है।
इसे मैं बहुत दिनों से देखता हूं। यह मेरे दोस्त जॉन स्मिथ का कुत्ता है, नाम
है पैडी। वह इसे बेहद प्यार करते हैं पैडी को स्कॉच शिकारी कुत्ते नापसंद