150 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
दिया जाएगा। इसका परिणाम यह होता है कि जब तक कि किसी पूरी शाखा को अस्पृश्यों के हवाले न कर दिया जाए, तब तक परिणामस्वरूप बहुत थोड़े पद ऐसे होंगे, जो अस्पृश्यों द्वारा भरे जा सकें। ठोस उदाहरण के रूप में कहा जाए तो नौकरी में सिर्फ एक क्षेत्र ही ऐसा है, जहां अस्पृश्यों के साथ कोई भेदभाव नहीं है और वह है, सफाई का काम। इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा की कोई जरूरत भी नहीं है, क्योंकि सारे के सारे पद अस्पृश्यों के लिए होते हैं और इस क्षेत्र में हिंदुओं की उनके साथ कोई प्रतिस्पर्धा नहीं होती। लेकिन यहां भी ऊंचे पदों के भरे जाने के मामले में भेदभाव बरता जाता है। सभी गंदा काम अस्पृश्यों द्वारा किया जाता है। लेकिन सभी पर्यवेक्षी पद जिनके वेतन अधिक होते हैं और जिनका गंदगी से कोई वास्ता नहीं होता, हिंदुओं के द्वारा भरे जाते हैं। इस परिस्थिति में नागरिकता के अधिकार का आशय अस्पृश्यों के अधिकार से नहीं होता। जनता की सरकार और जनता के लिए सरकार का आशय अस्पृश्यों के लिए सरकार से नहीं होता सभी के लिए समान अवसर का आशय अस्पृश्यों के लिए समान अवसर नहीं होता, समान अधिकार का आशय अस्पृश्यों के लिए समान अधिकार नहीं होता। सारे देश में कोने-कोने में अस्पृश्यों को अड़चनों का सामना करना पड़ता है, भेदभाव सहन करना पड़ता है, उनके साथ अन्याय होता है, वे भारत के सबसे अधिक दीन-हीन लोग हैं। यह कितना सच है, यह केवल अस्पृश्य जानते हैं, जिन्हें मुसीबतें उठानी पड़ती हैं। यह भेदभाव अस्पृश्यों के रास्ते में सबसे कठिन बाधा है। यह उनको इससे उबरने नहीं देती। इसके कारण उन्हें प्रतिक्षण किसी न किसी का, बेरोजगारी का, दुव्यर्वहार का, उत्पीड़न आदि का डर बना रहता है। यह असुरक्षा की जिंदगी होती है।
भेदभाव का एक और रूप भी है जो हालांकि बहुत ही अप्रत्यक्ष होता है, तथापि यह बहुत ही ठोस होता है। इसके अधीन सुयोग्य अस्पृश्यों की प्रतिष और उनकी मर्यादा को कम करने के सुनियोजित प्रयत्न किए जाते हैं। एक हिंदू नेता को एक महान भारतीय नेता बताया जाता है। कोई उसे कश्मीरी ब्राह्मणों का नेता नहीं कहता, हालांकि वह कश्मीरी ब्राह्मण होता है। अगर कोई नेता अस्पृश्य जाति का होता है, तब उसके बारे में यह कहा जाता है कि अमुक व्यक्ति अस्पृश्यों का नेता है। हिंदू डाक्टर को एक महान भारतीय डाक्टर बताया जाता है। कोई उसे अयंगार नहीं कहता, भले ही वह अयंगार क्यों न हो। अगर कोई डाक्टर अस्पृश्य जाति का होता है, तब यह कहा जाता है कि अमुक डाक्टर अस्पृश्य जाति का है। हिंदू गायक के बारे में कुछ भी कहते समय यह कहा जाता है कि वह एक महान भारतीय गायक है। अगर वही व्यक्ति अस्पृश्य जाति का हो, तब उसे अस्पृश्य