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अलग-थलग स्थिति की समस्या
अस्पृश्यों का आंदोलन क्यों सफल नहीं हुआ है? क्या उनके कोई समर्थक नहीं हैं? यदि हैं, तो वे अस्पृश्यों की सहायता और उनसे सहयोग क्यों नहीं करते? यह बड़ा ही संगत सवाल है और इस सवाल को ठीक-ठाक समझना भी आवश्यक है। इस सवाल का जवाब देने के पहले हमें यह जान लेना चाहिए कि हिंदू समाज का गठन क्या है और उसमें कौन-कौन से वर्ग शामिल हैं?
हिंदू समाज का ढांचा जटिल है और जिस किसी का जीवन इसके ताने-बाने से जुड़ा नहीं है, उसके लिए इसकी बनावट को समझ पाना कठिन है। हो सकता है कि इसे एक रेखाचित्र की सहायता से समझने में कुछ आसानी हो। इसलिए यहां नीचे मैं एक रेखाचित्र दे रहा हूं। मेरा विचार है कि इससे हिंदुओं के सामाजिक ढांचे को समझने में सुविधा होगीः
हिंदू
संवर्ण हिंदू अवर्ण हिंदू
प्रथम वर्ग द्वितीय वर्ग तृतीय वर्ग चतुर्थ वर्ग
| Col1 | Col2 |
|---|---|
उच्च जाति-द्विज निम्न जातियां- 1. आदिम जातियां अस्पृश्य त्रैवर्णिक-ब्राह्मण, शूद्र अथवा चतुर्थ 2. जरायम-पेशा जातियां
क्षत्रिय और वैश्य, वर्ण से उत्पन्न जातियां
इन तीन वर्णों से जातियां
उत्पन्न जातियां