अलग-थलग स्थिति की समस्या
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और उसके घड़े को भी तोड़ दिया। पुलिस ने सवर्ण हिंदू के खिलाफ मुकदमा दायर किया और सब-मजिस्ट्रेट ने उस पर सिर्फ पंद्रह रुपये का जुर्माना किया। उसके बाद से हरिजन उस सार्वजनिक तालाब से बेरोकटोक पानी ले रहे हैं। कोत्तागुडी में गांव के एक नाई ने हरिजन लड़के के बाल काटने से इंकार कर दिया। पुलिस ने उस पर मुकदमा चलाया और उसे सब-मजिस्ट्रेट ने सजा दी। लेकिन उसके बाद सवर्ण हिंदुओं ने हरिजनों को चावड़ी में बुलाया और चेतावनी दी कि अगर इस नाई के पास गए और बाल काटने के लिए कहा तो सबको जुर्माना भरना पड़ेगा।
किदारीपत्ती में हरिजनों को अनुमति नहीं है कि वे आम रास्ते से अपने शव को ले जाएं या गांव की गलियों में साइकिल पर सवार होकर निकलें। मैलूर में सब-मजिस्ट्रेट की अदालत में एक मुकदमा एक हरिजन को साइकिल की सवारी से रोकने के बाबत चल रहा है। नदिकोविलपत्ती में जो मैलूर तालुका कार्यालय से केवल तीन फर्लांग पर है, हरिजन एक गंदे नाले से पीने का पानी ले रहे थे, क्योंकि सार्वजनिक तालाब तक उनकी पहुंच नहीं हो सकती थी। इस संबंध में पुलिस में दो शिकायतें दर्ज कराई गईं और अब सवर्ण हिंदुओं की हिम्मत नहीं कि वे हरिजनों को रोक सकें। थेक्किथेरू में जब हरिजन उस समय मंथै चावड़ी पर जाकर बैठ गए जब कि चावड़ी में सार्वजनिक सभा हो रही थी, उन पर पत्थर फेंके गए, परिणामस्वरूप उन्हें डर के कारण वह स्थान छोड़ देना पड़ा।
मैलूर से कोई दो मील दूर नविनिपत्ती में कहा जाता है कि वहां के गांव के मुंसिफ ने पोंगल समारोह दिवस पर हरिजनों के अच्छे कपड़े पहनने पर एतराज किया और दो हरिजन युवकों को अपनी कमीजें और ऊपरी वस्त्र उतारने के लिए कहा। उन युवकों से यह भी कहा गया कि वे कुम्बी दल (साषंग प्रणाम) करें और केवल लुंगी पहनकर जाएं।
मदुरै नगर से कोई दस मील दूर मंकुलम में जो अत्याचार किया, वह सबसे अधिक कष्पूर्ण रहा। वहां ग्राम-मुंसिफ ने शत्रु जैसा व्यवहार किया। दो हरिजन युवक चाय की दुकान पर गए। उन्हें भीतर जाने से रोका गया। इस पर उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट कर दी। इसके लिए उनमें से एक को बड़े-बूढ़ों के इशारे पर एक सवर्ण हिंदू ने खंभे से बांध दिया और बेरहमी से पीटा। दूसरे हरिजन पर ग्राम-मुंसिफ के नौकर ने चाकू से हमला किया। हरिजनों का सामाजिक बहिष्कार किया गया और उन्हें काम नहीं दिया गया। उनका अपराध बस इतना था कि उन्होंने सार्वजनिक तालाब से पानी लिया था। दुकानदारों ने उन्हें खाने-पीने की