परिशिष्ट - Page 182

अलग-थलग स्थिति की समस्या

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झूठा मामला गढ़ा गया

उसके बाद गांव वालों ने जो कुछ किया, वह और भी शर्मनाक है। आमतौर पर होता यह है कि झूठे मामले हरिजनों के मत्थे मढ़ दिए जाते हैं और तुरंत कार्रवाई करने के लिए पुलिस बुला ली जाती है। जब यह पता चला कि हरिजनों को गंभीर चोटें आई हैं, तो गांव वालों को अहसास हुआ कि वे तो मुसीबत में फंस जाएंगे। पता चला है कि इसलिए संसद-सदस्य श्री पी. कक्कन के अस्सी वर्षीय पिता एवं ग्राम-प्रधान (थोट्टी) श्री पूसारी कक्कन से कहा गया कि वह यह झूठी शिकायत कर दें कि पिछली शाम को हरिजन मंदिर से कुछ चीजें गुम हो गईं और ग्राम के मुंसिफ ने पुलिस में रपट दर्ज करा दी कि ये चीजें हरिजन युवकों से बरामद की गई। कहा जाता है कि पूसारी कक्कन और एट्टी कक्कन नामक एक अन्य ग्राम-प्रधान ने ये चीजें लाकर ग्राम के मुंसिफ को दीं। सूचना पाते ही पुलिस तुरंत आ गई। उसने चोरी के आरोप में हरिजन युवकों को गिरफतार कर लिया और उन्हें अस्तपाल भेज दिया, क्योंकि वे घायल अवस्था में पाए गए। हमारा आशय सरेआम पुलिस की आलोचना करना नहीं है। इतना कहना काफी होगा कि ग्रामवासियों ने हरिजनों पर जो जुल्म किए वे पुलिस की सरकारी दृषि् से ओझल रहे।

सच का पता चल ही गया

यह अच्छा हुआ कि वे गांव वालों ने जो कुछ किया, उसके समर्थन में एक सामूहिक याचिका तमिलनाडु हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष वैद्यनाथ अय्यर के पास भेज दी। वह याचिका जांच करने और रिपोर्ट देने के लिए मेरे पास भेज दी गई। एक छोटी-सी कमेटी बनाई गई। उसमें मैलूर तालुका कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, मैलूर तालुका हरिजन सेवक संघ के सचिव, मैलूर सेवा समाज के सचिव, और मुझे शामिल किया गया। हमने तदनुसार मामले की जांच की। हमने पाया कि गांव वालों ने हरिजन युवकों को बेरहमी से मारा-पीटा और उन्हें कोई आठ घंटे पेड़ों से बांधे रखा। उसके बाद ही पुलिस वहां पहुंची। श्री पूसारी कक्कन और पेरियमबलगर की शिकायत की जांच-पड़ताल श्री वैद्यनाथ अय्यर ने की। उन्होंने श्री अय्यर के सामने स्वीकार किया कि पुलिस के पास दर्ज कराई गई शिकायत झूठी और मनगढ़त थी। पेरियमबलगर ने भी हरिजनों के प्रति किए गए अवैध कार्यों के लिए खेद प्रकट किया। इस बीच पुलिस ने श्री पूसारी कक्कन की शिकायत की जांच-पड़ताल की और मामले के बारे में कहा, ‘कुछ पता नहीं चल सका’, लेकिन उसने गांव वालों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया। लगता है कि