28 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जाना चाहिए, जहां उनकी अपनी-अपनी विधायिका, अपनी कार्यपालिका, अपनी न्यायपालिका होती है। अस्पृश्यों के दृष्किण में इससे बढ़कर कोई दुखद बात नहीं है। भगवान का श्ुक्र है कि संविधान सभा ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके बावजूद हिंदू अपनी इस बात पर हमेशा जोर देते हैं कि भारतीय गांव समाज-व्यवसथा के आदर्श रूप हैं। यह धारणा हिंदुओं की कोई पुश्तैनी धारणा नहीं है, और न इस धारणा की जड़ें उनके अतीत में छिपी हुई हैं। यह उन्होंने चार्ल्स मैटकाफ से ली है, जो ईस्ट इंडिया कंपनी में एक कर्मचारी था और राजस्व अधिकारी के पद पर काम करता था। उसने अपने राजस्व के दस्तावेजों में भारतीय गांवों का इस प्रकार वर्णन किया ख्1, ः
‘‘प्रत्येक गांव छोटे-छोटे गणराज्य हैं, जिनमें अपनी-अपनी आवश्यकता
की लगभग हर वस्तु मौजूद है, और वे दूसरों से पूर्णतः स्वतंत्र हैं। ऐसा लगता
है कि जब कुछ भी नहीं बचेगा, तब भी वे बने रहेंगे। सल्तनतें एक के बाद
एक गिरती जाती हैं, एक के बाद दूसरी क्रांति होती है। हिंदू, पठान, मुगल,
मराठा, सिख, अंग्रेज बारी-बारी से शासक बनते जाते हैं, लेकिन गांव वैसे
के वैसे ही रहते हैं। संकट के दिनों में वे अपनी रक्षा स्वयं कर लेते हैं। जब
आक्रामक सेनाएं देश को एक कोने से दूसरे कोने तक रौंदने लगती हैं, तब
गांव के लोग अपने-अपने जानवरों को अपने-अपने बाढ़े के अंदर बंद कर
लेते हैं और आक्रामकों को चुपचाप रास्ता दे देते हैं। अगर वे स्वयं लूटमार का
निशाना बनते हैं और फौजों के आक्रमण को नहीं झेल पाते हैं, तो वे भागकर
दूर के किसी गांव में चले जाते हैं। लेकिन जब फौजें निकल जाती हैं, तब
वे लौट आते हैं और अपना धंधा फिर शुरू कर देते हैं। अगर किसी भू-भाग
में बार-बार लूटमार और नर-संहार होता है और गांव फिर से आबाद न हो
सकें, तब लोग बिखर जाते हैं। लेकिन ज्यों ही अमन-चैन हो जाता है, त्यों
ही ये लोग अपने-अपने गांव फिर वापस आ जाते हैं। एक पीढ़ी गुजर जाती
है, लेकिन उसके बाद आने वाली पीढ़ी लौट आती है। बेटा, बाप की जगह
ले लेता है और अपने बाप-दादा के गांव आ जाता है, उसी जगह घर बनाता
है जहां उसके बाप-दादा का घर था, यह पीढ़ी भी वहीं पर फिर बस जाती
है जहां उसके पूर्वज गांव में फिर से आबाद होने पर दुबारा इसमें आए थे।
इस बार किसी छोटे-मोटे हमले से डरकर नहीं भागेगी, क्योंकि जब ये लोग
मुसीबतों का मुकाबला करने के लिए अपने दल गठित कर लेंगे और लूटमार
- बाडेन पोवेल द्वारा अपनी पुस्तक, लैंड सिस्टम आफ ब्रिटिश इंडिया, खंड 1 से उद्धत