4. भारत की बहिष्कृत बस्तियां-अस्पृश्यता की केन्द्र-समाज से बाहर - Page 45

30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. अस्पृश्यों को चाहिए कि वे अपने घर हिंदुओं की बस्तियों से दूर बनाएं।

अगर अस्पृश्य अपने घर दूर बनाने के इस नियम को तोड़ते हैं या उसकी

अनदेखी करते हैं, तब यह उनका अपराधा माना जाएगा। 2. अस्पृश्य लोगों के घर गांव के दक्षिण में होने चाहिए, क्योंकि चारों दिशाओं

में दक्षिण दिशा ही सबसे अधिक अशुभ होती है। इस नियम का उल्लंघन

अपराध समझा जाएगा।

  1. अस्पृश्य को चाहिए कि वह इस बात का ध्यान रखे कि उसके छू जाने

या उसकी छाया से भी पाप लगता है। अगर वह इस नियम को तोड़ता

है, तब वह अपराध करता है।

  1. अगर कोई अस्पृश्य अपने पास किसी भी प्रकार की कोई संपत्ति, जैसे

भूमि या पशु रखता है, तब वह अपराध करता है।

  1. अगर कोई अस्पृश्य अपने लिए खपरैल ख्1, की छत वाला घर बनाता है, तब

वह उसका अपराध माना जाता है।

  1. अगर कोई अस्पृश्य स्वच्छ कपड़े, जूते, घड़ी या सोने के जेवर पहनता

है, तब वह अपराध करता है।

  1. अगर कोई अस्पृश्य अपने बच्चों के अच्छे नाम रखता है, तब वह अपराध

करता है। उनके नाम ऐसे होने चाहिए, जो हीनता/घृणा सूचक हों। 8. अगर कोई अस्पृश्य किसी हिंदू के सामने किसी कुर्सी पर बैठता है, तब

वह अपराधा करता है।

  1. अगर कोई अस्पृश्य घोड़े पर चढ़कर या पालकी में बैठकर गांव से गुजरता

है, तो वह अपराध करता है।

  1. अगर कोई अस्पृश्य अपनी बिरादरी वालों का कोई जुलूस गांव से होकर

ले जाता है, तब वह अपराध करता है।

  1. अगर कोई अस्पृश्य किसी हिंदू को प्रणाम आदि नहीं करता, तब वह

अपराधकरता है।

  1. अगर कोई अस्पृश्य सभ्य लोगों की भाषा बोलता है, तब वह अपराध

करता है।

  1. गांवों में खपरैल की छत वाले मकान समृद्धि-सूचक होते थे। अब तो पक्के मकान बनने लगे हैं-संपादक