4. भारत की बहिष्कृत बस्तियां-अस्पृश्यता की केन्द्र-समाज से बाहर - Page 47

32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जाने वाले ऐसे काम करें, जो मुख्य कार्य के पहले किए जाने जरूरी होते

हैं।

  1. अस्पृश्यों के चाहिए कि वे कुछ त्यौहारों पर अपनी स्त्रियों को गांव के

बाकी लोगों के हवाले कर दें, जिससे वे उनके साथ फूहड़ मजाक आदि

कर सकें।

ये काम बिना मजदूरी लिए किए जाने होते हैं। इन कामों के महत्व को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि ये काम क्यों अस्तित्व में आए। गांव का हर हिंदू अपने आपको अस्पृश्यों से श्रेष् मानता है। वह अपने आपको सबका मालिक मानता है और इसलिए वह अपनी इज्जत को बनाए रखना बहुत जरूरी समझता है। वही अपनी इस इज्जत को तब तक कायम नहीं रख सकता, जब तक उसके इशारे पर नाचने वालों की भीड़ उसके आस-पास नहीं रहती। इसके लिए उसे अस्पृश्य ही मिलते हैं, जो उसका हर काम करने के लए तैयार रहते हैं और जिन्हें उसके लिए कुछ भी देना नहीं पड़ता। चूंकि अस्पृश्य असहाय होते हैं, अतः वे इस कारण इन कामों को करने से इंकार नहीं कर सकते और हिंदू भी उनसे जबरदस्ती काम करवाने से नहीं चूकते, क्योंकि वे उनकी प्रतिष की रक्षा करने के लिए जरूरी होते हैं।

अंग्रेज सरकार ने जब दंड-संहिता बनाई, तब उसमें इन अपराधों को शामिल नहीं किया गया। लेकिन जहां तक अस्पृश्यों का सवाल है, अपराध अभी भी वास्तविक हैं। इनमें से कोई भी अपराध करने पर अस्पृश्य को अवश्य सजा भुगतनी पड़ती है। ये नियम किस प्रकार लागू किए जाते हैं, यह अध्याय 5 और 6 से स्पष् हो जाएगा।

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि इन अपराधों के लिए जो सजा दी जाती है, वह सामूहिक होती है। चाहे अपराध किसी एक अस्पृश्य ने किया हो, लेकिन उसकी सजा पूरी जाति को भुगतनी होती है।

अस्पृश्य किस प्रकार रहते हैं? वे अपनी रोजी-रोटी किस प्रकार कमाते हैं, जब तक यह नहीं पता चलता है, तब तक हिंदू समाज में उनकी हैसियत का स्पष् पता लगना संभव नहीं।

एक कृषि-प्रधान देश में जीविका का प्रमुख साधन कृषि हो सकती है, परंतु रोजी-रोटी का यह साधन आमतौर से अस्पृश्यों के लिए उपलब्ध नहीं है। इसके