5. मनुष्यों में रहने के अयोग्य - Page 61

46 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उनतीस अगस्त 1946 के टाइम्स आफ इंडिया’ सेः

‘‘खेड़ा जिले के एक गांव में सवर्ण हिंदुओं ने हरिजनों के मकानों पर

हमला कर दिया। उनको संदेह था कि ये लोग जादू-टोना करते हैं, जिससे

जानवर मर जाते हैं।

कहा जाता है कि दो सौ ग्रामीण लाठियां लेकर हरिजनों के मकानों में घुस

आए, एक बुढि़या को पेड़ से बांध दिया और उसके पैर जला दिए। उन्होंने

एक और औरत की जबरदस्त पिटाई की।

हरिजन डरकर गांव से भाग गए। जिला हरिजन सेवक संघ के मंत्री छोटा

भाई पटेल को जब इस घटना का पता चला, तो वह हरिजनों को गांव वापस

ले आए हैं और उन्होंने हरिजनों की सुरक्षा के लिए अधिकारियों को एक पत्र

भेजा है।’’

एक और गांव से भी ऐसी ही घटना का समाचार मिला है। कहा जाता

है कि यहां भी हरिजनों की जबरदस्त पिटाई की गई है।

बात यही खत्म नहीं हो जाती। हिंसा की ऐसी ही एक और घटना हुई, जिसमें कहा गया है कि हिंदुओं ने मिलकर अस्पृश्यों पर हमला किया। यह खबर 22 सितम्बर, 1946 के ‘भारत ज्योति’ नाम समाचार-पत्र में छपी। इसका विवरण इस प्रकार हैः

‘‘वरसाड तालुका के हरिजन सेवक संघ के मंत्री को एक रिपोर्ट प्राप्त

हुई है, जिसमें कहा गया है कि खेड़ा जिले के वरसाड तालुका के एक गांव

में ग्रामीणों की भीड़ द्वारा किए गए हमले के कारण पांच हरिजन गंभीर रूप

से घायल हो गए। उनमें एक महिला भी थी। उन पर यह हमला धारियों और

लाठियों से किया गया। यह हमला लगभग सात बैलों के मर जाने के कारण

किया गया। गांव वालों को यह संदेह था कि हरिजन टोना-टोटका किया करते

हैं।

घायलों को अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस मौके पर पहुंच गई है

और कुछ लोगों को गिरफतार कर लिया गया है। कहा जाता है कि गांव वाले

हरिजनों को धमका रहे हैं कि यदि वे इस बारे में अधिकारियों से किसी तरह

की शिकायत करेंगे, तो उन्हें जिंदा जला दिया जाएगा।