6. अस्पृश्यता और अराजकता - Page 70

अस्पृश्यता और अन्याय

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मुसलमान सक्कों की मशक से (आर्य समाज के पंडितों के कहने पर) पानी लेना बंद कर दिया। अब वे बड़ी मुश्किल में हैं। गांव के जाटों ने न केवल उनहें अपने कुओं से पानी लेने के मना कर दिया है, बल्कि वे उन्हें अपने कुएं भी नहीं खोदने दे रहे हैं। बेचारे चमार गड्ढे और तालाबों से पानी लेकर अपना गुजारा कर रहे हैं। कल दलित सुधार समिति के मंत्री डाक्टर सुखदेवजी जांच करने के लिए ओपड आए और उन्होंने सब-कुछ अपनी आंखों से देखा। उन्होंने देखा कि चमारों की दुर्दशा वर्णनातीत है और जाटों द्वारा उन पर सचमुच ज्यादती हो रही है।’’

नौ मई 1931 के ‘टाइम्स आफ इंडिया’ में यह घटना छपी थीः

‘‘चूंकि बड़ौदा राज्य ने अपने यहां सवर्णों के साथ अन्त्यजों की बराबरी को मान्यता देने के लिए कानून बनाए हैं इसलिए यह आशा की जाती है कि निकटवर्ती ब्रिटिश क्षेत्र के अस्पृश्यों के मुकाबले यहां के अस्पृश्यों की दशा अच्छी होगी। लेकिन हाल में एक दिन पदरास तालुका में एक गरीब अन्त्यज औरत की खड़ी फसल को आग लगा दी गई और उसे बुरी तरह मारा-पीटा गया, क्योंकि उसने अपने बेटे को स्थानीय प्राइमरी स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा था। अब ऐसी ही एक घटना कादि प्रांत के चनास्मा गांव में हुई है। यहां अन्त्यजों की सहायता से एक कुआं खोदा गया, जिनसे यह वायदा किया गया कि वे भी कुएं से पानी ले सकेंगे। लेकिन जब कुआं बनकर तैयार हो गया, तब शुरू में यह कहा गया कि यह कुंआ उनके लिए नहीं है, और जब उन्हांने पंच से शिकायत की तो उसने उन्हें पांच सौ फुट लंबी एक पाइप बिछाने और उसके सिरे पर अपने लिए नल की टोंटी लगाने की अनुमति दे दी। इसके बाद अचानक ही जहां नल बनाया गया थां, उस जमीन का एक मालिक पैदा हो गया। तब इस पाइप लाइन को एक पोखर पर ले जाया गया, लेकिन इसका मतलब हुआ पोखर के पानी को गंदा करना, क्योंकि वहां लोग अपने गंदे कपड़े भी धोते। इसलिए नल कहीं और लगा दिया गया। लेकिन क्या इसके बाद मुसीबत टल गई? नहीं, क्रुद्ध सवर्ण हिन्दुओं ने कई बार इस पाइप लाइन को तोड़ा और अन्त्यज पानी के लिए तरसते रहे। जब श्री गांधी के अपने ही धर्म के लोग अस्पृश्यों के साथ ऐसा बर्ताब करें तो उन्होंने इन्हें जो ‘हरिजन’ का नाम दिया है, यह कितना ठीक है?’’

सत नवम्बर 1928 के ‘टाइम्स आफ इंडिया’’ में श्री संजना ने अपने एक पत्र में पीने के पानी के बारे में अस्पृश्यों की दयनीय स्थिति का वर्णन किया है, जो