अस्पृश्यता और अन्याय
59
अस्पृश्य को मारा-पीटा। उस गांव के कुछ अस्पृश्य लोग उस ब्राह्मण के खिलाफ मजिस्ट्रेट की कचहरी में फौजदारी की शिकायत लिखवाने के लिए धोलका पहुंचे। जब हिंदुओं ने देखा कि अस्पृश्यों के घरों में पुरुष वर्ग नहीं है, तब उन्होंने उनके घरों पर हमला बोल दिया। वे सभी लाठी, भाला और तलवारें लिए हुए थे। हमला करने वालों में सवर्ण हिंदुओं की औरतें भी थी। उन्होंने अस्पृश्य बूढ़ों और औरतों को मारना-पीटना शुरू कर दिया। इनमें से कुछ तो जंगलों में भाग गए। कुछ अपने दरवाजे बंद कर अपने-अपने घरों में छिप गए। इन हमला करने वालों ने उन अस्पृश्यों पर अपना गुस्सा उतारा, जिन पर उन्हें अपने बच्चों को गांव के स्कूल में दाखिला लेने के मामले में अगुवाई करने का शक था। उन्होंने उनके दरवाजे तोड़ डाले और जब उन्हें वे लोग नहीं मिले, तब उन्होंने उनके घरों की छतों की खपरैल और धन्नियां तहस-नहस कर दी।’’
‘‘जिन अस्पृश्यों को मारा-पीटा गया था, उन्हें अपने उन सगे-संबंधियों की चिंता थी, जो धोलका गए हुए थे और जो अब लौटने वाले थे। जब सवर्ण हिंदुओं को यह पता चला कि धोलका से वे लोग लौटने वाले हैं, तब वे झाडि़यों में छिपकर बैठ गए। जैसे ही एक अस्पृश्य औरत को इस बात का पता चला, वह रात के अंधेरे में छिपकर गांव से बाहर निकल गई। वह उन लोगों से मिली, जो वापस लौट रहे थे और उसने उन्हें बताया कि सवर्ण हिंदुओं का गिरोह हथियारों से लैस होकर उनकी ताक में झाडि़यों में छिपा बैठा है, और इसलिए वे गांव न जाएं। उन्होंने यह सोचकर उस औरत की बात को अनसुनी कर दिया कि उनकी गैरहाजिरी में तो हिंदू लोग और भी ज्यादा जुल्म ढा सकते हैं। साथ ही वे इस बात से भी सहमें हुए थे कि वे अगर वे गांव में घुसे तब वे मार डाले जाएंगे। इसलिए वे लोग आधी रात तक गांव के बाहर एक खेत में पड़े रहे। इस बीच हिंदुओं का गिरोह जो झाडि़यों में छिपा हुआ था, हार कर गांव लौट गया। अस्पृश्य अपने-अपने घरों में रात में करीब तीन बजे लौटे। अगर वे इससे पहले आ गए होते तो उनकी मुठभेड़ जालिम हिंदुओं के गिरोह से हो जाती और उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया होता। जब उन्होंने देखा कि उनके घरों को बुरी तरह से उजाड़ दिया गया है, तब वे सवेरा होने के पहले अहमदाबाद पहुंच गए और उन्होंने हरिजन सेवक संघ के मंत्री को सारी घटना कह सुनाई। यह संस्था वही है, जो श्री गांधी ने अस्पृश्यों के कल्याण के लिए स्थापित की है। लेकिन मंत्री भी लाचार था। सवर्ण जाति के लोगों ने न केवल मार-पीट