6. अस्पृश्यता और अराजकता - Page 84

अस्पृश्यता और अन्याय

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बल्कि वे बुद्धिमान भी होते हैं। शिमला की पहाडि़यों और उसके आसपास रहने वाले लोगों द्वारा जो भी गीत गाए जाते हैं। वे इन्हीं कोलियों के ही रचे हुए हैं। ये लोग दिन-भर मेहनत करते हैं और ब्राह्मणों को बहुत सम्मान देते हैं, लेकिन तो भी वे ब्राह्मणों के घरों के पास से होकर नहीं जा सकते। उनके बच्चे स्कूलों और पाठशालाओं में नहीं पढ़ सकते। उनकी स्त्रियां सोने के आभूषण नहीं पहन सकतीं। कहा जाता है कि कुछ कोली पंजाब गए और वहां उन्होंने पैसा कमाया, जिससे उन्होंने सोने की अगूठियां और कानों की बालियां खरीदीं। जब वे इन वस्तुओं को लेकर अपने-अपने घर लौटे तब उन्हें जेल भेज दिया गया ओर उन्हें तब तक नहीं छोड़ा गया जब तक कि उन्होंने ये सारी चीजें रियासत के अधिकारियों की नजर नहीं कर दीं।

तेईस जून 1926 के ‘प्रताप’ समाचार-पत्र में निम्नलिखित पत्र छपा हैः

स्वामी रामानंद सन्यासी लिखते हैं - 23 मार्च, 1926 की शाम को मेरे पास जाटों के चंगुल से छूटकर एक चमार आया। उसने मुझे गुड़गांव जिले में फरीदाबाद के पास खेड़ी गांव में अपनी जाति के लोगों पर किए गए अत्याचार की एक बड़ी दर्दभरी घटना सुनाई। मैं 24 मार्च को सवेरे फरीदाबाद पहुंचा, ताकि मैं इस मामले की छानबीन खुद कर सकूं। मैंने जो कुछ छानबीन की, उससे निम्नलिखित तथ्यों का पता चला-

‘‘गोरखी नाम के एक चमार की लड़की का ब्याह 5 मार्च को हुआ। इस चमार की आर्थिक स्थिति अन्य चमारों की तुलना में अच्छी थी, और उसने अपने मेहमानों का स्वागत ठीक वैसे ही किया, जैसे ऊंची जातियों में किया जाता है। जब उसने अपनी बेटी को विदा किया, तो उसे सोने के तीन जेवर दे दिए। यह खबर जाटों में फैल गई और उनमें इस बात की

खूब चर्चा रही। आखिर वे इस नतीजे पर पहुंचे कि नीची जाति के आदमी ने उनकी बराबरी करने की जो कोशिश की है, उससे ऊंची जाति के लोगों की तौहीन हुई है। 20 मार्च के सवेरे तक कोई वारदात नहीं हुई। लेकिन 21 तारीख को जाटों ने इस पर विचार करने के लिए एक पंचायत बुला ली। उसी दिन चमारों का एक दल जिसमें ज्यादातर लड़के, लड़कियां और औरतें थीं, मेहनत-मजदूरी करने फरीदाबाद जा रहा था। अभी वे कुछ ही दूरी पर धर्मशाला के आस-पास ही पहुंचे थे कि जाटों ने हमला बोल दिया। आदमियों को बुरी तरह मारा-पीटा गया और औरतों की जूतों से खबर ली गई। कुछ की कमर की हड्डी तोड़ दी गई और कुछ के हाथ-पैर तोड़े गए।