6. अस्पृश्यता और अराजकता - Page 85

70 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

यही नहीं हुआ, बल्कि उनके औजार तक छीन लिए गए। उस समय उधर

से एक मुसलमान गुजर रहा था। जाटों ने उसे भी पकड़ लिया और उससे

कानों की सोने की बालियां तथा 28 रुपये छीन लिए। 22 मार्च, को कुछ

जाटों का एक दल चमारों के खेतों में घुस गया और उसने वहां सब-कुछ

तहस-नहर कर दिया। इसमें लगभग एक हजार रुपये तक की फसल का

नुकसान था। उसी समय कोरी का बेटा ननुआ खेत में काम कर रहा था।

जाटों ने उसे भी मारा-पीटा। इसके बाद 22 मार्च को ही जाटों का एक और

दल निकल आया, जो मिट्टी के तेल में भिगोई हुई जलती मशालें लिए हुए

था। उनका इरादा चमारों के घरों में आग लगाने का था, लेकिन वे लोग

लौट आए। 23 मार्च की आधी रात को उस लड़की के दादा के मकान में

आग लगा दी गई, जिसका विवाह उक्त 5 मार्च को हुआ था। इस समय

यह मकान राख का ढेर हो चुका है। यहां लगभग 90 रुपये मूल्य की जूते

बनाने की छत तैयार खालें रखी हुई थी। मकान में रखे अन्य सामान के

साथ ये खालें भी जल गईं। अब हालत यह है कि जाटों ने कस्बे को घेर

रखा है, जिससे कोई चमार बाहर न जा सके। जाटों के डर के मारे बनियों

ने भी चमारों को सौदा बेचना बंद कर दिया है। तीन दिन से चमार और

उनके मवेशी भूख से मर रहे हैं।’’

अभी हाल ही में एक घटना मलाबार में हुई। इस घटना का ब्यौरा मलाबार में वहां के एम. एल. ए. श्री के कन्नन की अध्यक्षता में 5 जून को चेरुकुन्न में हुई प्रथम चिराकल तालुका हरिजन कांफेस में पारित निम्नलिखित प्रस्ताव में मिलता हैः

यह कांफ्रेंस हिंदुओं, मुसलमानों और ईसाइयों द्वारा मलाबार की अनुसूचित

जातियों पर अमानवीय दमन की बढ़ती हुई घटनाओं, विशेष रूप से पोन्नानी

तालुका के नत्तिका फिरका गांव की अनुसूचित जातियों पर बेरोक-टोक किए

जा रहे भयंकरतम दमन की घटनाओं की और सरकार और जनता से तुरंत ध्यान

देने का अनुरोध करती है, जहां लगभग नियमित रूप से हरिजनों का प्रतिदिन

आखेट इसलिए किया जा रहा है कि वे सोने के आभूषण और साफ-सुथरे

कपड़े पहनने तथा छाते रखने की कोशिश करने लगे हैं। मारपीट की अनेक

घटनाओं के अतिरिक्त, एक हरिजन बरात को लूटा गया और बरातियों को

मारा-पीटा गया, आदमियों के कुर्ते वगैरह और औरतों की साडि़यां जबरदस्ती

उतरवा ली गईं तथा 27 मई, 1945 को वदनपिल्ली में एक हरिजन विद्यार्थी

को निर्दयतापूर्वक पीटा गया। यह कांफ्रेंस यहां के प्रगतिशील थिया नवयुवकों