6. अस्पृश्यता और अराजकता - Page 93

78 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वकालत कर रहे हैं’’

पंद्रह अप्रैल 1945 के ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में यह खबर छपी हैः

‘‘कहा जाता है कि बेगार करने से इंकार करने पर अंबाला जिले के

दुखेड़ी गांव में राजपूतों ने बहुत हरिजनों को मारा-पीटा। इनमें एक औरत और

एक आदमी के मरने की खबर है। ये दोनों ही हरिजन थे। यह भी कहा जाता

है कि हरिजनों के बहुत से मकानों को आग लगा दी गई है। कमिश्नर और

पुलिस उप-महानिरीक्षक को तार भेजकर अनुरोध किया गया कि मामले की

जांच की जाए।’’

इन घटनाओं से यह स्पष् हो जाता है कि हिंदू, अस्पृश्यों को दबाकर रखने और स्वयं निश्चित की गई व्यवस्था को लागू करने में हिंसा का सहारा लेने, यहां तक कि हत्या करने से भी नहीं हिचकते हैं।

श्री लाजपत राय ने अपनी पुस्तक ‘अनहैप्पी इंडिया’ में मिस मेयो के आरोपों का जवाब देने की कोशिश की है, जो उन्होंने अपनी पुस्तक ‘मदर इंडिया’ में लगाए हैं। श्री लाजपत राय ने अमरीका में कू क्लक्स क्लैन नामक संगठन के सदस्यों द्वारा नीग्रो लोगों की बेरहमी से की गई हत्याओं और उन पर किए गए अत्याचारों का विस्तृत और सजीव वर्णन किया है।

वे लिखते हैंः

‘‘लेकिन मैं उनसे (मिस मेयो से) यह पूछना चाहता हूं कि पेरिया जाति

के प्रति ब्राह्मणों का दृष्किण क्या उस दृष्किण से ज्यादा अन्यायपूर्ण और

निर्ममतापूर्ण है, जो अमरीका में कू क्लक्स क्लैन के लोगों का नीग्रो लोगों के

प्रति रहा है?’’

श्वेत ने अश्वेतों पर जो अत्याचार किए, उनकी तुलना में भारत में जाति

के नाम पर जो कुछ है, क्या वह अत्याचार है?’’

अगर लाला लाजपत राय ने इन अत्याचारों का पता लगाने की कोशिश की होती तो उन्हें यह जरूर मालूम हो जाता कि अस्पृश्यों पर हिंदुओं की यातनाएं और अत्याचार नीग्रो लोगों पर अमरीकनों की यातनाओं और अत्याचारों से किसी प्रकार भी कम नहीं हैं। यदि इन यातनाओं की संसार को उतनी जानकारी नहीं है, जितनी की नीग्रो लोगों के अत्याचारों की है तो इसका कारण यह है कि कोई ऐसा हिंदू लेखक नहीं है जिसने इस सच्चाई को छिपाने की सदा कोशिश नहीं की है।

कुछ लोग कह सकते हैं कि हिंदुओं की स्थापित व्यवस्था और उसके तहत