प्रजातंत्रवाद या नाजीवाद - Page 403

प्रजातंत्रवाद या नाजीवाद ३६१

दिया-गया तो मुझे विश्वासं है कि ऐसे लोक बहुत कम होंगे जो इस अदूरदर्शी विचार को ठीक समझेंगे | कांग्रेस ने पहिले तो केवल इस बात की मांग की कि अंग्रेज अपने युद्ध-उद्देश्यों को बता दें और उसकी यह मांग नहीं थी कि लड़ाई के दौरान में उनपर कार्रवाई की जाय | दूसरी बात यह है कि जहां तक मैं समझता हूँ कि ऐसा कोई भी भारतीय राजनीतिज्ञ नहीं है जो रक्षाविभाग का कला-सम्बन्धी और सैनिक कार्य चला सकें |

कोई सहानुभूति नहीं

” तीसरी बात यह है कि जब क्रिप्स प्रस्तावों से सारे विभाग भारतीयों को दे दिये गये थे तो रक्षा-विभाग के न दिये जाने पर झगड़ा करना लड़कपन था। कोई भी समझदार आदमी यह समझ सकता है कि यदि किसी जरूरी और उचित बात पर हस्तान्तरित विभाग जोर देते तो सुरक्षित विभाग are न जाते | यही बात उस समय गवर्नरों के विशेष अधिकारों के काम में लाने के सम्बन्ध में हुई जब कांग्रेस ने पद ग्रहण किया था । यह बड़े अचरज की बात है कि कांग्रेस इस सम्बन्ध में अपने ही अनुभव को भूल गई |

मेरी स्पष्ट राय है कि कांग्रेस का यह सविनय अवज्ञा आन्दोलन किसी भी सहानुभूति के योग्य नहीं । इसे देश-सेवा का जो मौका दिया गया था उसे इसने ठुकरा दिया । यह बात देखते हुये मेरी समझ में यह नहीं आता कि गांधीजी का यह काम किस तरह देश के लिये हितकर है। मुझे ऐसा मालूम होता है कि गांधीजी उस गौरव को फिर से प्राप्त करने की कोशिश कर रहें हैं जो उन्होंने

और कांग्रेस ने युद्ध छेड़ने के समय से गंवा दिया है । कांग्रेस गौरव के साथ

इन ढंगों में से किसी ढंग पर रह सकती है । वह यातो खुल्लमखुल्ला आन्दोलन करके या पद ग्रहण करके जीवित रह सकती है। गांधीजी ने कांग्रेस को पद त्याग करने के लिए बाध्य किया और सत्याग्रह में भाग लेने से इन्कार किया! गांधीजी की इस कुछ न करने की नीति से कांग्रेस के गौरव पर जो चोट पहुंची वह गांधीजी और कांग्रेस के लिए अनर्थकारी सिद्ध हुई और गांधीजी ने यह दुस्साहसपूर्ण चाल इसलिए चली है कि उन्हें अपना पुराना स्थान मिल जाए। कांग्रेस दल के हितों के लिए यह चाल भले ही हितकर हो! किन्तु निश्चय ही यह ढंग देश-सेवा का नहीं है। इस समय गांधीजी की यह चाल शरारत से भरी हुई है और इससे देश को जरूर ही बड़ी हानि पहुंचेगी |

“ इस देश को राजनीतिक उन्नति के लिए काँग्रेस पार्टी के सामने दो रास्ते हैं : (१) खुल्लमखुल्ला आन्दोलन करना और (२) उन सब दलों की सम्मिलित