प्रजातंत्रवाद या नाजीवाद - Page 404

३६२ डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर लेखन आणि भाषणे

मांग पेश करना जो देश के भिन्न भिन्न दलों के प्रतिनिधि करें । गांधीजी और कांग्रेस पहिले मार्ग पर चलने के लिए बड़े उत्सुक हैं। यह एक ऐसी योजना है जिसे तैयार करने के लिये सोचने की जरूरत नहीं | गांधीजी के सिवाय हर आदमी जानता है कि कुछ हद तक काम देने के बाद यह योजना बिलकुल बेकार हो जाती हे और यदि यह सफल भी होती है तो ब्रिटिश सरकार नाजी सरकार की तरह पाशविक शक्ति का प्रयोग करने की आदी नहीं है और एक नैतिक आन्दोलन को दबाने के लिए ऐसी बातें नहीं करती जो नैतिक न हों |

“ गांधीजी यह बात न मानेंगे, किन्तु इसका कारण यही है कि सौभाग्य से उन्हें इसका कोई अनुभव नहीं है कि उनके आन्दोलन के साथ नाजी लोग कैसा बर्ताव करेंगे। नाजियों को गांधीजी के दमन करने में देर न लगेगी और वे यह सिद्ध ,कर देंगे कि उनका खुल्लमखुल्ला आन्दोलन शुरू होते ही समाप्त हो सकता है |

झुठे इलजाम

“ वह प्रश्‍न जिससे मैं परेशान हूं यह है कि गांधीजी केवल कांग्रेस केही बल पर खुल्लमखुल्ला आन्दोलन क्यों चलाते हैं जबकि वह इतना बेकार सिद्ध हो चुका है | वह दूसरे उपाय अर्थात्‌ समस्त दलों में एकता कराने का प्रयत्न क्यों नहीं करते ? गांधीजी देश के विभिन्न दलों के नेताओं की एक कान्फरेंस क्यों नहीं बुलाते, और यदि उनकी मांगों के विषय में कोई झगड़ा है तो उनका निपटारा क्यों नहीं करते। यह ऐसा उपाय है जिसके लिये यत्न करने की जरूरत है यह भी राजनीतिज्ञों का एक ढंग है और एक ऐसा ढंग है जिससे जातियों में सदा के लिये शांति स्थापित हो जायगी । किन्तु गांधीजी ने कभी भी ऐसा यत्न नहीं किया और यह बात मेरी समझ में कभी नहीं आई कि उन्होंने यह समस्या इस प्रकार क्यों नहीं हल की । मेरी समझ में इस बात के, कि जब तक अंग्रेज भारत में हैं कोई समझौता नहीं हो सकता, दो ही अर्थ हो सकते हैं : (१) अल्प संख्यक जातियों के नेता अंग्रेजों के हाथ के खिलौने हैं या (२) कांग्रेस समझती है कि ब्रिटिश सरकार के चले जाने के बाद साम्प्रदायिक समझौते की बातचीत करना अच्छा होगा, क्योंकि कांग्रेस को, जिसके हाथ में उस समय शांति स्थापित करने का अधिकार होगा, अल्प संख्यक जातियों को अपनी शर्ते मनवाने तथा समझौता करने के लिये मजबूर करने का अच्छा मौका मिल जायेगा ।

“ अगर इसका मतलब पहिली बात से है तो यह अल्प संख्यक जातियों के नेताओं के चरित्र पर एक बहुत बुरा और बेहूदा इल्जाम है। कांग्रेस को यह विचार