प्रजातंत्रवाद या नाजीवाद - Page 406

३६४ डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर लेखन आणि भाषणे

चली जाती | इस बात की कोई सम्भावना नहीं थी कि जापान या जर्मनी भारतवर्ष में आ जायेंगे और उसके मालिक बन जायेंगे। यह सम्भावना अब हमारे सामने है। यह पागलपन होगा अगर हमें ऐसे समय में जब कि बर्बर जातियां हमारे द्वार पर हैं और उनका इरादा न केवल अंग्रेजों को हराना है बल्कि हम लोगों को हमेशा के लिए गुलाम बना देना है, इस बात की चेष्टा करें कि यहां की. शांति को भंग करें। जिस जन-आन्दोलन की गांधीजी ने इस समय धमकी दी है उसमें और सन्‌ १९३० ई. के आन्दोलन में यही सबसे बड़ा अन्तर

है|

“ कांग्रेस और गांधीजी सारे देश की ओर से बोलने का दम भर रहे हैं। यह एक झूठा दावा है, परंतु किसी ने भी इस बात की परवाह न की कि उसका खंडन करे | इसका यह कारण है कि लोगों में यह भावना थी कि जब तक कांग्रेस देश के हितों को कोई हानि नहीं पहुंचाती तब तक कोई बात नहीं यदि वह राष्ट्र के नाम पर या अपने दल के नाम पर बोलने का दावा करती है। परन्तु उस समय जबकि कांग्रेस जो कि केवल एक दल है ऐसी नीति पर चलने को कह रही है जिससे देश की रक्षा और उसकी स्वतंत्रता भी खतरे में पड़ जाती है, दूसरे दलों का यह कर्तव्य हो जाता है कि वे अपनी उदार तटस्थता की नीति को छोड़ दें और कांग्रेस का विरोध करें |

“ मैं चाहता हूँ कि भारत के लोक दो बाते समझ लें। सबसे पहिले वे यह समझ लें कि उनका भाग्य प्रजातंत्रवाद की नाजीवाद पर विजय के साथ जुड़ा हुआ है । दुसरी बात यह है कि प्रजातंत्रवाद की जीत होने पर संसार को कोई भी शक्ति यदि भारतवासी एक हो जाय भारत को आजाद होने से रोक नहीं सकती | मुझे विश्वास है कि गांधीजी को ऐसा काम करना ही न चाहिये था अगर प्रजातंत्रवाद की जीत होती है तो भारत की स्वतंत्रता के रास्ते में कोई भी रोडे नहीं अटका सकता | भारतवासियों का इस समय सबसे बड़ा काम यह है कि वे इस बात की कोशिश करें कि प्रजातंत्रवाद की जीत हो। उन्हें ऐसा केवल सिद्धान्त के ही नाते न करना चाहिए | हमारा कर्तव्य है कि अपने देश के भविष्य के लिए हम ऐसा करें |

“ गांधीजी वृद्ध हे और जल्दी में हे | भारतवासियों को सावधान हो जाना चाहिये कि कोई काम जल्दी में न करें जिसके लिए उन्हे पीछे पछताना पडे |

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Lucknow.